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रविवार, 5 नवंबर 2017

जिंदा होकर भी जिंदा नहीं

बिना पहचान के लोग
विश्व बैंक ने कहा कि दुनिया भर में 110 करोड़ लोग एेसे है जो अधिकारिक तौर पर दुनिया में हैं ही नहीं । यानी कि उन लोगों की कोई पहचान नहीं है। ये लोग बिना किसी पहचान, प्रमाण के जींदगी गुजार रहे है।

 विश्व बैंक को विकास के लिए  पहचान कार्यक्रम के तहत यह जानकारी प्राप्त हुई है ।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 1/3 संख्या बच्चों की है जिनका जन्म के समय पंजीकरण नहीं हुआ।


बिना पहचान पत्र वाले लोगः
  • 78  उपसहारा अफ्रीका और एशिया में हैा
  •  40% आबादी  18 साल से कम उम्र के लोगों की 
  • 5 साल का हर छठा बच्चा बिना पहचान का 
  • विश्व बैंक के मुताबिक दुनिया में बिना पहचान के जीने वाले लोगों की संख्या भारत में है। 
आयवर्ग                       आबादी करोड़ में
निम्न मध्य आय             59.93  
निम्न आय                 34.00
उच्च मध्य आय            9.59

उच्च आय वाले देशों में बिना पहचान के  जी रहे है। उसी सूची में अफ्रीका पहले पायदान पर है।उच्च मध्य आय वाले देशों में बिना पहचान के जी रहे है इसमें दक्षिण एशिया का पहला स्थान है। 

दुनिया की लगभग 18 % आबादी के पास पहचान पत्र नहीं है।


बिना पहचान पत्र वाले लोगों में महिलाएं-------
देश                         महिलाएं(प्रतिशत)
माल्दोवा                      71.55
अल सल्वाडोर              57.32
स्लोवेनिया                 56.88
फलिस्तीन                 52.10
इटली                         51.64
फिनलैंड                      51.57
  
देश                           आबादी
भारत                        20.97 करोड़

नाइजीरिया                14.91 करोड़
अमेरिका                   9.50 करोड़
पाकिस्तान               8.30 करोड़
इथोपिया                  6.43  करोड़
बांग्लादेश                  4.20 करोड़
डी आर कांगो            3.39 करोड़

तंजानिया                  2.93 करोड़ 
साउदी अरब              2.31 करोड़
युंगाडा                    2.03 करोड़
चीन                       1.36 करोड़

प्रतिशत के हिस्सा हिस्सा से बिना पहचान वाले लोग------------
देश                         आबादी (प्रतिशत)
नाइजीरिया              77.77 
इरीट्रिया                     71.28
सउदी अरब                 70.79 
सोमालिया                     70.31
कुवैत                         68.50
मोनाको                       63.18
इथोपिया                      61.68
ओमान                        61.46
इंडिया                       लगभग 15


क्षेत्र के हिसाब से बिना पहचान पत्र वाले लोग---------
 क्षेत्र                   आबादी करोड़ में
अफ्रीका                   50.02
दक्षिण एशिया                35.70
मध्य पूर्व और उत्तरीय अफ्रीका---- 8.24 
पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र 7.21
लैटिन और मध्य अमेरिका-----4.55 
पूर्व और मध्य एशिया ------- 1.90 
अन्य                       2.45

विश्व बैंक ने आय के मुताबिक देशों को चार भागों में बांटा है जिनमें निम्न और मध्य आय वाले देशों के हालात सबसे ज्यादा खराब है।


 पहचान न होने के कारण
* गैर पंजीकृत लोग क्यों है-
  • कुछ लोगों को पंजीकरण का महत्व ही नहीं मालूम , जागरूकता के चलते   इनके बच्चे पहचान से महरूम हो जाते है।
  • कई देशों में पंजीकृत पाने की लागत ज्यादा है।
  • गरीबी और अशिक्षा 
  • पंजीकरण केन्द्र की दूरी
  • सरकारी दफ्तरों में जाने का डर
  • अधिकारियों के रवैया
  • भ्रष्टाचार
  • तंत्र में अविश्वास व रूढ़िवादिता
  • कुछ समूदायों के बीच लोगों को पहचान जाने का डर
  • सरकारी नीतियां
  • सरकारी भेदभाव तथा सुविधाएं छिननें का डर
गैर-पंजीकृत लोग कौन है---
  • अल्पसंख्यक 
  • अवैध प्रवासी
  • अनाधिकृत लोग
  • हिंसा पीड़ित
  • घुंमन्तू जातियां

आधार का इस्तेमाल-----------
बैंक खाते , लोन , पेंशन, मनी ट्रांसफर, टेक्स भुगतान, सामाजिक लाभ, नौकरी आदि.....

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर
 इसे 2010 में 15 राज्यों तथा दो केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वभाविक निवासियों के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर तैयार करने का काम शुरू हुआ। इसके लिए डाटा संकलन और एंट्री का काम भारत सरकार के आईटी विभाग को दिया गया। 62 करोड लोगों की पहचान से जुडी तमाम सूचनाएं शामिल की गयी। यह काम अक्टुबर 2013 में पूर्ण हो गया।
 भारत में पहचान के कानूनी प्रमाण -----------
  • जमीन के फोटो युक्त कागजात
  • पीओआई कार्ड, पैन कार्ड
  • जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • फोटो युक्त किसान बही
  • शस्त्र लाइसेंस, सरकारी विभागों से जारी पहचान पत्र
  • बैंक पासबुक , फोटो बैंक एटीएम कार्ड
  • स्वतंत्रता सेनानी पहचान पत्र
  • फोटो क्रेडिट कार्ड, शादी पंचीकरण
  • गजट नोटिफिकेशन, गैस कनेक्शन
  • दिव्यांग सर्टिफिकेट, पेंशनर कार्ड
  • सर्विस रिकार्ड पुस्तिका, वेतन की कापी
  • जाति व निवास प्रमाण पत्र
  • मतदाता पहचान पत्र
मतदाता पहचान पत्र------
निर्वाचन आयोग से जारी मतदाता पहचान पत्र भारत में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। देश में 18 साल से ज्यादा के लोग जो मतदाता के तौर पर पंजीकृत है। देश में 81.4 करोड़ मतदाताओं में से 95% वोटरों के पास वोटर आईडी है।
सर्वाजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले लाभ से जु़ड़ा राशन कार्ड लोगों को पंजीकरण और पहचान यह भी एक माध्यम है।   



दुनिया के देशों में पहचान तंत्र

1. थाईलैंड में लागू नेशनल आईडी नंबर में वहाँ की सरकार नें देश व्यापी स्वास्थ्य कवरेज हासिल कर लिया है। इससे वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

2. पेरू में यूनिवर्सल रजीस्ट्रेशन एंड पॉपुलेशन स्कीम के चलते प्राकृतिक आपदाओं में जरूरत मंदों तक मदद पहुंचाने में तेजी आई है।
3. पाकिस्तान में बायोमेट्रिक पहचान के व्यवस्या के बाद महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर में मदद मिली है।जिससे वह अपने अनुसार खर्च पाने की स्थित में आयी है।
4. भारत में आधार योजना के चलते सरकारी लाभ और सब्सिडी सीधे जरूरत मंदों के खातों में पहुँचने में मदद मिल रही है।           
 
  

क्यों आता है गुस्सा

               एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर(एपीडी)
  • एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर दस विभिन्न प्रकार के पर्सनेल्टी डिस्ऑडर में से एक है।
  • एंटीसोशल से तात्पर्य है एेसी गतिविधियों से है जो समाज के नियमों के विरूध , समाज को नुकसान पहुंचाने वाली होती है । इस रोग से पीडि़त व्यक्ति की सोच और व्यवहार दोनों ही दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाला होता है। एेसे लोग आपने लिए न तो दंड और न ही परिणाम की चिंता करते है और न ही पीड़ित व्यक्ति से किसी प्रकार की  सहानुभूति होती है।
  • कुछ एपीडी से पीड़ित लोगों  में मानसिक समस्याएं और सोंच दोष पूर्ण  पायी जाती है।
  • वंशानुगत मानसिक समस्या घटिया सोंच और उत्तेजनतापूर्ण व्यवहार का कारण हो सकती है।
  •  जिन लोगों में एपीडी वंशानुगत होता है। उन्हें आगर सही वातावरण और पालन पोषण न मिले तो यह समस्या काफी जटिल हो जाती है।

कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर

  • बच्चे और युवा अक्सर शरारते या दुर्व्यवहार करते है लेकिन कुछ बच्चों की आदतों में पाया जाता है।बच्चों और युवाओं में मिलने वाली यह एक भयानक समस्या है 

    कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर के में निम्न शामिल है ----    


    1.  झुठ बोलना
    2. चोरी करना
    3. बिना बताये चलेजाना
    4. जानवरों और लोगों के प्रति क्रुरता
    5. धमाका 
    6. मारपीट करना
    7. किसी हथियार से दूसरों को चोट पहुंचाना
    8. तोड़-फोड करना 
    9. आग लगाना आदि शामिल है।
    • इस रोग से पीड़ित बच्चे अकेले या समूह बनाकर हिंसा करते हैं।
  • इस रोग की शुरूआत बचपन से होती है आगे चलकर यही व्यवहार एपीडी का रूप धारण कर लेती है।
  • जहां एक ओर व्यवहार वंशानुगत जीनों से प्रभावित होता है और दूसरी ओर यही आस-पास के लोगों का व्यवहार(मारपीट, धुमक्कडी, टीवी पर फिल्में , वीडियो गेम्स आदि) भी इसके लिए जिम्मेदार होता है। 

न्यूरोट्रांस्मीटर रसायनों का व्यवहार पर प्रभाव

  • आक्रमक व्यवहार के लिए जिम्मेदार जीन क्रोमोसोम की छोटी भुजा पर स्थित होता है।  जीन मोनो एमीनोआक्सीडेस-ए नामक एंजाइम का काम तीन प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर रसायनों को तोड़ना होता है। जो तंत्रिका उद्दिपनों के प्रशारण को तेज और धीमा कर देता है। 1. नॉरएपीनोफ्राइन- रक्तचाप और शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाता है। 2. न्यूरोटॉस्मीटर
  • व्यवहार मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रण होता है। जीन, डीएनए के ट्रांस्क्रिप्सन और ट्रांसलेशन के जरिए मस्तिष्क के विकास दिशा देती है। मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाली जीनों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन , व्यवहार भी निर्धारित आनुवांशिक क्रियाओं को बदल या बिगाड़ सकता है। 
 
 

शनिवार, 28 अक्टूबर 2017

विश्व संसद

                    संयुक्त राष्ट्र

  • हर साल 24 अक्टुबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है। इसदिन दुनिया भर के देश वैश्विक शांति, विकास और सहयोग का संकल्प लेते है।
  • वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव - एंटोनियो गुटेरेज
  • इसका मुख्यालय-  न्यूयार्क 
  • 24  अक्टुबर 1945 को दुनिया के 50 देशों ने यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में आया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर-
  • 1945 में स्वीकृत संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आने वाली पीढियों को युद्ध से बचाने , आम लोगों के मानवाधिकारों  की रक्षा, बडे़ और छोटे राष्ट्रों को समान अधिकार, अन्तर्राष्ट्रीय न्याय और सम्मान, सामाजिक प्रगति और अच्छा जीवन स्तर , एक दूसरे से सहयोग की भावना, सामान्य हित में ही सशस्त्र बल के प्रयोग जैसी अहम बातों को शामिल किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र दिवस पर पहली बार 1971 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अन्तर्राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया।
  •  अमेरिका ने 1942 में ही 26 देशों के साथ मिलकर एक समझौता किया । और वही से संयुक्त राष्ट्र की राह खुली । आखिरकार 24 अक्टुबर 1945 को यूएन की स्थापना हुई।
  • 4-11 फरवरी 1945 के बीच अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने मिलकर एक सम्मेलन किया। सम्मेलन में उस वक्त के तीन सबसे शक्तिशाली - 1.  अमेरिका के राष्ट्रपति -फ्रेन्कविन रूजविल्ट, 2. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री - विन्सटल चर्चिल  और 3. सोवियत संघं -मार्शल जोसेफ स्टोलेन  ने इसी बैठक में यूएन में स्थाई सदस्य का बीज  वोया गया। तीनों मुल्क इस बात पर सहमत हुए कि संयुक्त राष्ट्र के भीतर तीनों को वीटो का अधिकार प्राप्त होगा।
  • जब 24 अक्टुबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का एेलान हुआ तब स्थाई सदस्यों की सूची में दो और देश शामिल हुए  जिसनें फ्रांस और चीन । लेकिन 1971 तक ताइवान भी चीन के रूप में संयुक्त राष्ट्र का स्थाई सदस्य रहा।
  • 1971 क चीन को यूएन ने मान्यता दी तब से मौजूदा चीन सुरक्षा परिषद का सदस्य है।
  • 1946-58 के बीच तक फ्रांस में भी सत्ता के बदलाव के चलते दो बार देश का नाम बदलना पड़ा लेकिन 1958 में मौजूदा फ्रांस को यूएन का स्थाई सदस्य माना जा रहा है।
  • 24 अक्टुबर 1945 को जब यू एन की स्थापना हुई थी तब इसमें उस समय 51 सदस्य थे जो वर्तमान समय में  193 सदस्य है।
संयुक्त राष्ट्र के कई अंग-
1. महासभा- नीतिगत फैसला लेने का काम, हर साल सितंबर में न्यूयार्क में बैठक होती है, शांति , सुरक्षा और सदस्यता जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।
2.सुरक्षा परिषद- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद की है।, इसमें पांच स्थायी  और 10 अस्थाई सदस्य है।
3. यूनेस्को परिषद- आर्थिक, सामाजिक , पर्यावरण के मुद्दों पर सदस्य देशों से बातचीत और नीतिगत फैसले का काम यूएन का है। सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र का सबसे कारगर संगठन यूनेस्को है।

4. न्यास परिषद-संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय न्यास परिषद की भी स्थापना हुई थी। इसका काम था कि 11 प्रान्तों की देखभाल करना था लेकिन ये प्रान्त धीरे-2 सभी आजाद हो गये तो 1994 में इसके काम-काज को बंद कर दिया गया ।
5. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय- संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिक संगठन है यह एेसा संगठन है जिसका मुख्यालय न्यूयार्क से बाहर नीदरलैंड के द् हेग में है।
6. सचिवालय-  संयुक्त राष्ट्र के बाकी सभी सगठनों के काम-काज की जिम्मेदारी सचिवालय के ऊपर है।

 संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियां-----------
  • जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता
  • ओजोन परत को बचाने
  • मिस्त्र के पिरामिड समेत कई विश्व धरोहरों की रक्षा 
  • पोलियो, खसरा, एड्स और इबोला जैसी बीमारियों के खात्में
  •  इराक,अफगानिस्तान और श्रीलंका में निष्पक्ष चुनाव कराने
  • सीरिया, लेबनान, सूडान,अफगानिस्तान और लीबिया के लाखों शरणर्थियों की मदद
  • कोसोवो , उत्तरी कोरिया, सूडान , सेन्ट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और हैती समेत कई देशों में शांति मिशन पिछले 70 सालों में संयुक्त राष्ट्र की बढी उपलब्धियां माना जा सकताी है।
  • इस संस्था ने 1956 में स्वेज नहर संकट, एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद की प्रक्रिया को रोकने में अपनी भूमिका निभाई।
  • अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच शांति युद्ध को कम करने के लिए काम किया।
  • 1962 का  क्यूबा मिसाइल संकट समेत कई एेसे संकट आये जब यूएन ने शांति बनाये रखने में अहम भूमिका निभाई।
  • सीरिया के लाखों शरणर्थियों का टुर्की, लेबनान, और जार्डन जैसे पडोसी देशों में पुर्नर्वास में भी सहयोग किया।
  • अफ्रीका में जारी संघर्ष को हल करने के लिए शांति मिशनों की शुरूआत की ।
  • विकास की अवधारणा को बढा़वा दिया।
  • मानवाधिकारों को प्रोत्साहन 
  • समाज  के विकास के लिए नागरिकों की क्षमताओं का बढा़या।
नाकामियांःःःःःःःःःःःःःःः
  • पिछले 50 सालों में कई एेसे मौके आये जब इसकी भूमिका पर सवाल उठे
  • इस दौरान फलीस्तीन , म्यांमार, बोस्निया हिंसा, सूडान और सीरिया मेंं नरसंहार रोकने में नाकाम रहा।
  • शासक वर्ग के अत्याचार, मजबूत देशों की मनमानी और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कोई मजबूत कदम नहीं उठा सका।
  • इराक पर अमेरिकी हमला, लीबिया में पश्चिमी देशों के कार्यवाही , अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं की मौजूदगी, यमन में सउदी गठबंधन सेनाओं के आम नागरिकों पर हमले , सीरिया में मजबूत देशों के मनमाने फैसले , और म्यांमार मामले है जहाँ यूए नाकाम रहा। 
 सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता में भारत की चुनौतियाँःःःःः
  • संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता के लिए दुनिया की बडी शक्तियाँ भारत के समर्थन में सामने आयी है।
  • फ्रांस , ब्रिटेन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ऐसे स्थाई सदस्य है जो पहले से ही भारत के दावे को समर्थन देते रहे है।
  • अमेरिका और चीन भारत का समर्थन नहीं करते थे लेकिन अमेरिका ने अब खुलकर भारत की दाबेदारी को समर्थन देना शुरू किया है। चीन भी कई बार भारत के पक्ष में बय़ान दे चुका है।
  • स्थाई सदस्यता के लिए भारत के अलावा जर्मनी, जापान और ब्राजील भी दाबेदारी मजबूत है भारत और इन तीन देशों ने जी-4 का गठन इसी मकसद से किया है। जी-4 सभी अपने देशों की स्थाई सदस्यता चाहता है।
  • अर्जेन्टीना, इटली , कनाडा , कोलंबिया और पाकिस्तान ने जी-4 की कोशिशो को नाकाम करने के लिए जुलाई 2005 में काफी का गठन किया । यह मंच मौजूदा पांच देशों की स्थाई सदस्यता को सुरक्षित रखने का पक्षधर है। इस गठन का नेतृत्व पाकिस्तान और इटली के हाथों में है।भारत को लेकर चीन ने कोई विराध नहीं किया लेकिन इस कलव को सराहना दी।


  


     

शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

जापान में मध्यावधि चुना

जापान के मध्यावधि चुनाव में अाबे की जीत

एलडीपी- लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत

जापान चुनाव-

  •  संसद की 465 सीटों के लिए चुनाव
  • एलडीपी को संसद में 312 सीटों पर जीत दर्ज हुई।
  • विपक्षी गठबंधन को महज 126 सीटें मिली।
जापान संसद
  • कार्यकाल- 4साल
  • 1947 में बने संविधान के अनु. 7 के तहत राजा को समय से पहले संसद भंग करने का अधिकार मिला हुआ है।
  • संसद भंग होने के 40 दिनों के भीतर चुनाव कराने जरूरी है।
  • 2015 में वोट डालने की उम्र 20 साल से 18 साल कर दी गई।
  • चुनाव में जीत के बाद आबे तीसरी बार एलडीपी के नेता बन सकते है। इसका फैसला अगले सितंबर में होगा। इसके बाद आबे जापान में सबसे लम्बे समय तक बने रहने वाले नेता बन जायेगे।
शिंजो आबे
  •  पहली बार 2012 में अाबे प्रधानमंत्री बने।
  • 2014 में हुए आम चुनाव में आबे के गठबंधन को 326 सीटें मिली।
  • तब संसद में कुल 472 सीटे थी।
  • इस बार शिजों आबे का मुकाबला यूरिको कोईको की की पार्टी  पार्टी ऑफ होप और यूकियो इदानो के नेतृत्व वाली मध्यवाम कांस्टीयूसनल डेमोक्रेटिक पार्टी से था।

जापान की चुनाव प्रक्रिया-
  •  हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स -निचला सदन (चुनाव चार साल में)
  • यह चार साल में भंग होती है।
  • जापान में हाउस ऑफ काउन्सलर्स के लिए 3 साल बाद चुनाव होते है। जिसमें सदन के आधे सदस्यों का चुनाव होता है।
  • अगर कोई जापान में 3 महीनों तक रह चुका है और उसके पास रिहाइस का दस्तावेज है तो वह वोट दे करता है।
  • निचले सदन के लिए न्यूनतम उम्र -25 साल 
  • ऊपरी सदन (हाऊस ऑफ काउन्सलर्स) के लिए 30 साल 
  • निचले सदनें सदस्य- 475
  • 295 -सीधे चुनाव द्वारा
  • 180 का आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुने जाते है।
  • ऊपरी सदन-242 सदस्य
  • जिनका कार्यकाल 6 साल का होता है।
  • 146 सीधे चुनाव द्वारा
  • 96 आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुनाव
  • 1980 और 1986 जब दोनों सदनों के चुनाव साथ-साथ हुए।
नई सरकार की चुनौतियां-
    • समय से पहले चुनाव कराकर शिंजो आबे ने विपक्ष की पार्टियों को मौका नहीं दिया
    •  लोगों ने आबे पर फिर से भरोसा जताया और उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए आबे पर दबाव होगा।
    • स्कूल फंडिंग विवाद को दुरूस्त करना होगा।
    • इस चुनाव में आबे ने मुक्त शिक्षा का वादा किया।जिसका दबाव नई सरकार पर होगा।
    • शिंजो आबे ने घटती आबादी पर चिंता जताई थी। और इसके लिए सरकार को नये सिरे से काम करना होगा।
    • स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरूस्त करने का वादा किया।
    • लेकिन नई सरकार को जापान की आर्थिक हालत सुधारने का सबसे ज्यादा दबाव है।
    • अक्टुबर 2019 में उपभोग कर बढा़ने के पुराने लक्ष्य को संशोधित करना होगा। इस कर को समय से पहले बढा़ना होगा। क्योेंकि इससे केंद्र और राज्य सरकारों के बोझ को कम किया जा सके।
    • इस समय जापान पर 8 लाख 81 हजार डॉलर का कर्ज है।
    • योजना के मुताबिक उपभोग कर में 10% की बढोंत्तरी हो सकती है। इस कर को बढाने से जनता में नाराज़गी से यह संतुलन बनाना नई सरकार के लिए चुनौती पूर्ण होगा।
    • जापान में बढ़ रही बेरोजगारी पर लगाम कसना नई सरकार के लिए बहुत जरूरी है।
    • कुछ महीनों से उत्तर कोरिया ने अशांति का माहौल बनाया है। उसके बाद जापान के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला सबसे महत्वपूर्ण है।
    • जापान दुनिया का एक एेसा देश है जो परमाणु हमले झेल चुका है।
    • कोरियन प्रायद्वीप में लगातार परमाणु हथियारों की होड़ ने जापान की चिंता बढा़ दी है। नई सरकार को इस महौल जनता को निकालने की चुनौती होगी।
    • अशांत कोरियन प्रायद्वीप में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कुटनीति बढात का दबाव आबे पर होगा। दक्षिण कोरिया के आलावा पडोसी देशों को जो़डना जापान के लिए बेहद जरूरी है।
    • चीन और रूस के साथ जापान की दोस्ती को बढाने की दरकार।
    • संविधान संशोधन की मांग
    • पहली बार संविधान संशोधन का दबाव, इसको पारित करने के लिए आबे को दोनों सदनों में  दो तिहाई बहुमत से पारित करना होगा, इसके बाद जनमत संग्रह भी कराना होगा।

       

        अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर-

      • आबे की जीत के बाद जापान और अमेरिका का रक्षा सहयोग बढेगा।
      • जापान के ऊपर से गुजरी उत्तर कोरियाई मिसाइलों ने जापान में सुरक्षा चिंताये बढायी।

        भारत के साथ संबंध

      • जापान में परमाणु ऊर्जा के पक्ष में उदारवादी आर्थिक नीतियांँ अमल में लाई जा सकती है।
      • शिंजो आबे की नीति से भारत के संबंध काफी मायने रखते है। हाल ही में आबे गुजरात आये वहां उन्होनें प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ मिलकर भारत की पहली बुलट ट्रेन का शिलान्यास किया। जापान ने भारत को 190 यॉन का कर्ज देने का वादा किया है।
      •  जापान के वर्षों से सांस्कृतिक संबंध रहे है। 
      • भारत का स्वाधीनता आंदोनल दोनों देशों के इतिहास को जोड़ता है।
      • 6वीं सदी में बौद्ध भिक्षुक जापान पहुंचे यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक शुरूआत मानी जाती है।
      • दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद सेना ने जापान के सहयोग से अंग्रजों से लडा़ई लड़ी।
      • भारत जब आजाद हुआ तब दोनो के बीच अच्छे रिश्ते कायम रहे।
       
    • दोनों  देशों के बीच सालाना व्यापार लगभग 18 अरब डॉलर
    • जापान का भारत में एफडीआई- 15 अरब डॉलर
    • मारूती(भारत)-सुजुकी(जापान) बड़ा संयुक्त उपक्रम जो भारतमें सबसे बडी कार निर्माता कंपनी
    • भारत -जापान के बीच मुक्त व्यापार समझौता-2011
    • प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की लुक इस्ट नीति जो जापान से बेहतर रिश्ते की वकालत करती हिै।
    • शिंजो आबे आर्क ऑफ फ्रीडम के पैरोकार। 
         
 

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची

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