डाक
- 09 अक्टुबर ,1874 को जनरल पोस्टल यूनियन की शुरूआत।
विश्व डाक दिवस (इतिहास)
- 9 अक्टुबर 1874 को जनरल पोस्टल यूनियन बनी
- स्विटजरलैंड के बर्न में 22 देशों के बीच संधि हुई।
- 1 जुलाई 1875 को पोस्टल संधि लागू हुई।
- 1अप्रैल 1879 को जनरल पोस्टल यूनियन का नाम बदल कर यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कर दिया गया लेकिन इसकी स्थापना वैश्विक संचार क्रांति की शुरूआत थी।
- 1969 में जापान के टोकियो में आयोजित एक कार्यक्रम में 9 अक्टुबर को विश्व डाक दिवस घोेषित किया गया। तब कहा गया कि यह दिवस अन्तर्राष्ट्रीय पत्रों के लिए पूरे संसार में मुक्त प्रवाह का रास्ता खोलने की कोशिश है।
यूनिवर्सनल पोस्टल यूनियन
- यूपीयू संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है।
- डाकघरोेें ने दुनिया के एक जगह से दूसरी जगह रहने वाले लोगों को संप्रेषण का माध्यम उपलब्ध कराया।
- यूपीयू की स्थापना से पहले सभी देशों को अपने यहाँ पत्र भेजनें के लिए द्विपक्षीय या बहुपक्षीय संधियां करनी पड़ती थी।
- डाक भेजने वाले को हर चरण और रास्ते में पडने वाले देश को अलग से शुल्क चुकाना पढ़ता था। इस परेशानी को दूर करने के लिए 1863 में अन्तर्राष्ट्रीय पोस्टल कांन्फेंस बुलायी गयी। इसके बाद यूपीयू का गठन किया गया।
- यूपीयू के सदस्य देश-1992
- यह संस्था हर साल विश्व डाक दिवस पर पोस्टर जारी करती है।
- यूपीयू के वर्तमान महानिदेशक- बशर अब्दुल रहमान हुसैन
चिट्ठियों की दुनिया
- भारतीय डाक ने 1998 में 15 अरब 74 करोड़ चिट्ठियां बांटी-
- 1997-98---15अरब 74 करोड़
- 2006-07--- 6अरब 39करोड़
- 2012-13--- 6 अरब 5 करोड़
- 2013-14---6 अरब 8 करोड़
- देश में एक अरब बीस लाख टेलीफोन और मोबाईल कनेक्शन के धारक है।
- 1985-86 में 1198 करो़ड चिट्ठियां बांटी। जब देश में मोबाइल ने दस्तक दी तब भी सालाना देश में 1550 करोड़ पत्र वितरित किए जा रहे थे।
डाक विभाग को नुकसान पोस्टरकार्ड
- लागत- 7 रूपये 53 पैसे
- आय- सिर्फ 50 पैसे
- नुकसान-7रूपये 03 पैसे
अन्तरदेशीय पत्र
- लागत- 7 रूपये
- आय -2.50रूपये
- नुकसान- 5रुपये
- भारत में डाकघर 1 लाख 55 हजार यह दुनिया में सबसे ज्यादा है संसार में डाकघरों की कुल संख्या 6 लाख 40 हजार है।
- भारत में 89 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र में है।
अाजादी के समय डाकघर( इंडिया)
- कुल- 23344
- ग्रामीण- 19184
- शहरी -4160
- 1879 - पोस्ट कार्ड की शुरूआत
- 1930 - भारतीय पोस्टल आर्डर
- 1977- वीपीपी पार्सल और बीमा पार्सल की शुरुआत
- 1972- पोस्टल इंडेक्स नंबर
- 1985- डाक और दूरसंचार विभाग को अलग -अलग कर दिया गया।
- 1986- स्पीड पोस्ट की शुरूआत
- 1994- मेट्रो राजधानी व्यापार चैनल और विसेट के माध्यम से मनी ऑर्डर भेजा जाने लगा।
डाक विभाग का विकास (राज्यसभा में सरकार का विकास)
- आईटी आधुनिकीकरण परियोजना
- सेवा सुधार के लिए प्रोजेक्ट ऐरो
- नेटवर्क विस्तार के लिए एमएनओपी योजना
- स्वचालित डाक प्रोसेसिंग केन्द्र
- ट्रेक एण्ड ट्रेस की सुविधा
- 27215 डाक घर /कार्यलय वैन से जोडे
- एक्सप्रेस पार्सल
- बिजनेस पार्सल
- कैश ऑन डिलीवरी
- ऑनलाइन मनी ट्रांसफर सेवा
- इंस्टेट मनी ऑर्डर
- ई-ग्रीटिंग
- मोबाईल एेप
- 1837 - पोस्ट ऑफिस अधिनियम
1 अक्टुबर 1837 - भारत का पहला डाकघर कोलकाता में खोला गया। लेकिन इसका इस्तेमाल ज्यादातर अग्रेंज ही करते थे। - 1जुलाई 1852 - सिंधु में पहली डाक मुहर बनी
- 1854- डाक टिकट(1आना, आधा आना, 4आना) की बिक्री शुरू हुई । इन टिकटोंट पर रानी विक्टोरिया की तस्वीर थी।
- 1926- नासिक में डाक टिकटों की छपाई का काम शुरू आ
- 21 नबंवर 1947- आजाद भारत का पहला टिकट जय हिन्द के नारे के साथ जारी किया गया।
- मार्च 2016- देश में 154910 डाकघर है।
- आजादी के बाद डाक में 7गुना वृद्धि
- 21.22 वर्ग किमी. एक डाकघर है।
- उमा सोनीपत की रहने वाली है। जो भारत की पहली महिला डाकिया मानी जाती है।

