रोहिग्या
रखाइन प्रान्त के मुख्य मंत्री- न्यी पू
- 10 लाख से अधिक रोहिग्या मुसलमान रहते है।
- संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में म्यांमार सरकार पर मानवता हनन का आरोप लगाया । म्यांमार सरकार ने इसे गलत बताया।
- म्यांमार और बांग्लादेश को अलग करने वाली नदी- नाफ नदी
- 2000 रोहिग्या बांग्लादेश आने में सफल हुए।
- नो मैन लैंड में ही रोहिग्या मुसलमानों ने शरण ले रखी है।
- म्यांमार में इनकी आबादी 11 लाख से ज्यादा
- लाखों लोगों को म्यांमार की नागरिक का दर्जा नहीं दिया गया
- 2015 में रोहिग्या पर कई हमले हुए
- 2000 लोगों को इडोनेशिया ने शिविर में रहने की शरण दी।
- रोहिग्या अपना देश म्यांमार मानते है।
- रोहिग्या मूल रूप से म्यांमार की पश्चिमी सीमा के निवासी है।
1872-1911 के बीच अराकान में रोहिग्या मुसलमानों की संख्या 1.78 लाख थी।
- 1942 में इस इलाके में भीषण हिंसा हुई जिसमें सौकडों लोग मारे गये।
- अंग्रेजों के जाने के बाद म्यांमार में फौजी शासन की शुरूआत हुई।
- 1962 में रोहिग्या मुसलमानों ने अलग देश की मांग की।
- 1948 में म्यांमार की आजादी के बाद रोहिग्या मुसलमानों ने रखाइन प्रान्त को पूर्वी पाकिस्तान में मिलाने की कोशिश की जिसके बाद उनकाो हिंसक दमन का सामना करना पड़ा.
- इसके बाद 1968 में रखाइन बौद्ध के लड़ाकों ने अराकान आजादी आंदोलन शुरू किया।
बांग्लादेश की ओर पलायन
- 17 वीं शताब्दी के आखिरी वर्ष
- 18 वीं शताब्दी के शुरूआत में
- 1940 के दशक
1991-92 ऑपरेशन प्यी भापा
2012 हिंसा
2015-16 तस्करी संकट और हिंसा
भारी तादाद में रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे
