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शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

रोहिग्या

                            रोहिग्या

रखाइन प्रान्त के मुख्य मंत्री- न्यी पू
  • 10 लाख से अधिक रोहिग्या मुसलमान रहते है।

    • संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में  म्यांमार सरकार पर मानवता हनन का आरोप लगाया । म्यांमार सरकार ने इसे गलत बताया।
    • म्यांमार और बांग्लादेश को अलग करने वाली नदी- नाफ नदी
    • 2000 रोहिग्या बांग्लादेश आने में सफल हुए।
    • नो मैन लैंड में ही रोहिग्या मुसलमानों ने शरण ले रखी है।
    • म्यांमार में इनकी आबादी 11 लाख से ज्यादा 
    • लाखों लोगों को म्यांमार की नागरिक का दर्जा नहीं दिया गया 
    • 2015 में रोहिग्या पर कई हमले हुए
    • 2000 लोगों को इडोनेशिया ने शिविर में रहने की शरण दी।
    • रोहिग्या अपना देश म्यांमार मानते है।
    • रोहिग्या मूल रूप से म्यांमार की पश्चिमी सीमा के निवासी है।
     दुनिया भर में रोहिग्या मुसलमानों की आबादी 15-20 लाख के बीच है। इनमें आधे से ज्यादा म्यांमार में रहते है। म्यांमार के उत्तरी इलाकों में बसे रोहिग्या समूदाय के बारे में मसहूर है कि ये लोग 14 वीं सदी के दौरान बंगाल से म्यांमार आये थे। दरअसल अराकान प्रान्त का शासक मिन सा मोन 24 साल बंगाल में निर्वासित रहा।                                                                                                                                                             1430 में अराकान प्रान्त पर बंगाल के शासक जलालुद्दीन  का कब्जा हो गया। मिन सा मोन को जलालुद्दीन ने तख्त पर बैठा दिया। इसकी मदद् के लि कुछ बंगाली सैनिक और अधिकारी भेजे गये। जो बाद में यही बस गये। इन्हीं लोगों को रोहिग्या कहा जाता है। अराकान प्रान्त का दूसरा नाम रखाइन है।
 1785 में अराकान पर बौद्धों ने कब्जा कर लिया। लगभग 35 हजार लोगों ने भागकर बंगाल में शरण ली। उस वक्त बंगाल पर अंग्रेजों का शासन था। 1826 में अराकान अंग्रेजों के कब्जे में था। अंग्रेजों ने रोहिग्या मुसलमानों को दूवारा अराकान में बसाना शुरू किया । क्योंकि अंग्रेजों को खेती  के लिए मजूदरों की जरूरत थी।

1872-1911 के बीच अराकान में रोहिग्या मुसलमानों की संख्या 1.78 लाख थी।
  • 1942 में इस इलाके में भीषण हिंसा हुई जिसमें सौकडों लोग मारे गये।
  • अंग्रेजों के जाने के बाद म्यांमार में फौजी शासन की शुरूआत हुई।
  • 1962 में रोहिग्या मुसलमानों ने अलग देश की मांग की।
  • 1948 में म्यांमार की आजादी के बाद रोहिग्या मुसलमानों ने रखाइन प्रान्त को  पूर्वी पाकिस्तान में मिलाने की कोशिश की जिसके बाद उनकाो हिंसक दमन का सामना करना पड़ा.
  • इसके बाद 1968 में रखाइन बौद्ध के लड़ाकों ने अराकान आजादी आंदोलन शुरू किया।

बांग्लादेश की ओर पलायन

  • 17 वीं शताब्दी के आखिरी वर्ष
    • 18 वीं शताब्दी  के शुरूआत में
    • 1940 के दशक
                             साल          कारण
                               1978               ऑपरेशन ड्रैगन किंग
                                 1991-92         ऑपरेशन प्यी भापा
                               2012              हिंसा 
                               2015-16           तस्करी संकट और हिंसा
भारी तादाद में रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे





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