एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर(एपीडी)
- एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर दस विभिन्न प्रकार के पर्सनेल्टी डिस्ऑडर में से एक है।
- एंटीसोशल से तात्पर्य है एेसी गतिविधियों से है जो समाज के नियमों के विरूध , समाज को नुकसान पहुंचाने वाली होती है । इस रोग से पीडि़त व्यक्ति की सोच और व्यवहार दोनों ही दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाला होता है। एेसे लोग आपने लिए न तो दंड और न ही परिणाम की चिंता करते है और न ही पीड़ित व्यक्ति से किसी प्रकार की सहानुभूति होती है।
- कुछ एपीडी से पीड़ित लोगों में मानसिक समस्याएं और सोंच दोष पूर्ण पायी जाती है।
- वंशानुगत मानसिक समस्या घटिया सोंच और उत्तेजनतापूर्ण व्यवहार का कारण हो सकती है।
- जिन लोगों में एपीडी वंशानुगत होता है। उन्हें आगर सही वातावरण और पालन पोषण न मिले तो यह समस्या काफी जटिल हो जाती है।
कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर
बच्चे और युवा अक्सर शरारते या दुर्व्यवहार करते है लेकिन कुछ बच्चों की आदतों में पाया जाता है।बच्चों और युवाओं में मिलने वाली यह एक भयानक समस्या है
कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर के में निम्न शामिल है ----
- झुठ बोलना
- चोरी करना
- बिना बताये चलेजाना
- जानवरों और लोगों के प्रति क्रुरता
- धमाका
- मारपीट करना
- किसी हथियार से दूसरों को चोट पहुंचाना
- तोड़-फोड करना
- आग लगाना आदि शामिल है।
- इस रोग से पीड़ित बच्चे अकेले या समूह बनाकर हिंसा करते हैं।
- इस रोग की शुरूआत बचपन से होती है आगे चलकर यही व्यवहार एपीडी का रूप धारण कर लेती है।
- जहां एक ओर व्यवहार वंशानुगत जीनों से प्रभावित होता है और दूसरी ओर यही आस-पास के लोगों का व्यवहार(मारपीट, धुमक्कडी, टीवी पर फिल्में , वीडियो गेम्स आदि) भी इसके लिए जिम्मेदार होता है।
न्यूरोट्रांस्मीटर रसायनों का व्यवहार पर प्रभाव
- आक्रमक व्यवहार के लिए जिम्मेदार जीन क्रोमोसोम की छोटी भुजा पर स्थित होता है। जीन मोनो एमीनोआक्सीडेस-ए नामक एंजाइम का काम तीन प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर रसायनों को तोड़ना होता है। जो तंत्रिका उद्दिपनों के प्रशारण को तेज और धीमा कर देता है। 1. नॉरएपीनोफ्राइन- रक्तचाप और शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाता है। 2. न्यूरोटॉस्मीटर
- व्यवहार मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रण होता है। जीन, डीएनए के ट्रांस्क्रिप्सन और ट्रांसलेशन के जरिए मस्तिष्क के विकास दिशा देती है। मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाली जीनों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन , व्यवहार भी निर्धारित आनुवांशिक क्रियाओं को बदल या बिगाड़ सकता है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें