जापान के मध्यावधि चुनाव में अाबे की जीत
एलडीपी- लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत
जापान चुनाव-
- संसद की 465 सीटों के लिए चुनाव
- एलडीपी को संसद में 312 सीटों पर जीत दर्ज हुई।
- विपक्षी गठबंधन को महज 126 सीटें मिली।
- कार्यकाल- 4साल
- 1947 में बने संविधान के अनु. 7 के तहत राजा को समय से पहले संसद भंग करने का अधिकार मिला हुआ है।
- संसद भंग होने के 40 दिनों के भीतर चुनाव कराने जरूरी है।
- 2015 में वोट डालने की उम्र 20 साल से 18 साल कर दी गई।
- चुनाव में जीत के बाद आबे तीसरी बार एलडीपी के नेता बन सकते है। इसका फैसला अगले सितंबर में होगा। इसके बाद आबे जापान में सबसे लम्बे समय तक बने रहने वाले नेता बन जायेगे।
- पहली बार 2012 में अाबे प्रधानमंत्री बने।
- 2014 में हुए आम चुनाव में आबे के गठबंधन को 326 सीटें मिली।
- तब संसद में कुल 472 सीटे थी।
- इस बार शिजों आबे का मुकाबला यूरिको कोईको की की पार्टी पार्टी ऑफ होप और यूकियो इदानो के नेतृत्व वाली मध्यवाम कांस्टीयूसनल डेमोक्रेटिक पार्टी से था।
जापान की चुनाव प्रक्रिया-
- हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स -निचला सदन (चुनाव चार साल में)
- यह चार साल में भंग होती है।
- जापान में हाउस ऑफ काउन्सलर्स के लिए 3 साल बाद चुनाव होते है। जिसमें सदन के आधे सदस्यों का चुनाव होता है।
- अगर कोई जापान में 3 महीनों तक रह चुका है और उसके पास रिहाइस का दस्तावेज है तो वह वोट दे करता है।
- निचले सदन के लिए न्यूनतम उम्र -25 साल
- ऊपरी सदन (हाऊस ऑफ काउन्सलर्स) के लिए 30 साल
- निचले सदनें सदस्य- 475
- 295 -सीधे चुनाव द्वारा
- 180 का आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुने जाते है।
- ऊपरी सदन-242 सदस्य
- जिनका कार्यकाल 6 साल का होता है।
- 146 सीधे चुनाव द्वारा
- 96 आनुपातिक प्रतिनिधित्व से चुनाव
- 1980 और 1986 जब दोनों सदनों के चुनाव साथ-साथ हुए।
- समय से पहले चुनाव कराकर शिंजो आबे ने विपक्ष की पार्टियों को मौका नहीं दिया
- लोगों ने आबे पर फिर से भरोसा जताया और उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए आबे पर दबाव होगा।
- स्कूल फंडिंग विवाद को दुरूस्त करना होगा।
- इस चुनाव में आबे ने मुक्त शिक्षा का वादा किया।जिसका दबाव नई सरकार पर होगा।
- शिंजो आबे ने घटती आबादी पर चिंता जताई थी। और इसके लिए सरकार को नये सिरे से काम करना होगा।
- स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरूस्त करने का वादा किया।
- लेकिन नई सरकार को जापान की आर्थिक हालत सुधारने का सबसे ज्यादा दबाव है।
- अक्टुबर 2019 में उपभोग कर बढा़ने के पुराने लक्ष्य को संशोधित करना होगा। इस कर को समय से पहले बढा़ना होगा। क्योेंकि इससे केंद्र और राज्य सरकारों के बोझ को कम किया जा सके।
- इस समय जापान पर 8 लाख 81 हजार डॉलर का कर्ज है।
- योजना के मुताबिक उपभोग कर में 10% की बढोंत्तरी हो सकती है। इस कर को बढाने से जनता में नाराज़गी से यह संतुलन बनाना नई सरकार के लिए चुनौती पूर्ण होगा।
- जापान में बढ़ रही बेरोजगारी पर लगाम कसना नई सरकार के लिए बहुत जरूरी है।
- कुछ महीनों से उत्तर कोरिया ने अशांति का माहौल बनाया है। उसके बाद जापान के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला सबसे महत्वपूर्ण है।
- जापान दुनिया का एक एेसा देश है जो परमाणु हमले झेल चुका है।
- कोरियन प्रायद्वीप में लगातार परमाणु हथियारों की होड़ ने जापान की चिंता बढा़ दी है। नई सरकार को इस महौल जनता को निकालने की चुनौती होगी।
- अशांत कोरियन प्रायद्वीप में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कुटनीति बढात का दबाव आबे पर होगा। दक्षिण कोरिया के आलावा पडोसी देशों को जो़डना जापान के लिए बेहद जरूरी है।
- चीन और रूस के साथ जापान की दोस्ती को बढाने की दरकार।
- संविधान संशोधन की मांग
- पहली बार संविधान संशोधन का दबाव, इसको पारित करने के लिए आबे को दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से पारित करना होगा, इसके बाद जनमत संग्रह भी कराना होगा।
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर-
- आबे की जीत के बाद जापान और अमेरिका का रक्षा सहयोग बढेगा।
- जापान के ऊपर से गुजरी उत्तर कोरियाई मिसाइलों ने जापान में सुरक्षा चिंताये बढायी।
भारत के साथ संबंध
- जापान में परमाणु ऊर्जा के पक्ष में उदारवादी आर्थिक नीतियांँ अमल में लाई जा सकती है।
- शिंजो आबे की नीति से भारत के संबंध काफी मायने रखते है। हाल ही में आबे गुजरात आये वहां उन्होनें प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ मिलकर भारत की पहली बुलट ट्रेन का शिलान्यास किया। जापान ने भारत को 190 यॉन का कर्ज देने का वादा किया है।
- जापान के वर्षों से सांस्कृतिक संबंध रहे है।
- भारत का स्वाधीनता आंदोनल दोनों देशों के इतिहास को जोड़ता है।
- 6वीं सदी में बौद्ध भिक्षुक जापान पहुंचे यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक शुरूआत मानी जाती है।
- दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिंद सेना ने जापान के सहयोग से अंग्रजों से लडा़ई लड़ी।
- भारत जब आजाद हुआ तब दोनो के बीच अच्छे रिश्ते कायम रहे।
- दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार लगभग 18 अरब डॉलर
- जापान का भारत में एफडीआई- 15 अरब डॉलर
- मारूती(भारत)-सुजुकी(जापान) बड़ा संयुक्त उपक्रम जो भारतमें सबसे बडी कार निर्माता कंपनी
- भारत -जापान के बीच मुक्त व्यापार समझौता-2011
- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की लुक इस्ट नीति जो जापान से बेहतर रिश्ते की वकालत करती हिै।
- शिंजो आबे आर्क ऑफ फ्रीडम के पैरोकार।


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