रविवार, 5 नवंबर 2017

जिंदा होकर भी जिंदा नहीं

बिना पहचान के लोग
विश्व बैंक ने कहा कि दुनिया भर में 110 करोड़ लोग एेसे है जो अधिकारिक तौर पर दुनिया में हैं ही नहीं । यानी कि उन लोगों की कोई पहचान नहीं है। ये लोग बिना किसी पहचान, प्रमाण के जींदगी गुजार रहे है।

 विश्व बैंक को विकास के लिए  पहचान कार्यक्रम के तहत यह जानकारी प्राप्त हुई है ।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 1/3 संख्या बच्चों की है जिनका जन्म के समय पंजीकरण नहीं हुआ।


बिना पहचान पत्र वाले लोगः
  • 78  उपसहारा अफ्रीका और एशिया में हैा
  •  40% आबादी  18 साल से कम उम्र के लोगों की 
  • 5 साल का हर छठा बच्चा बिना पहचान का 
  • विश्व बैंक के मुताबिक दुनिया में बिना पहचान के जीने वाले लोगों की संख्या भारत में है। 
आयवर्ग                       आबादी करोड़ में
निम्न मध्य आय             59.93  
निम्न आय                 34.00
उच्च मध्य आय            9.59

उच्च आय वाले देशों में बिना पहचान के  जी रहे है। उसी सूची में अफ्रीका पहले पायदान पर है।उच्च मध्य आय वाले देशों में बिना पहचान के जी रहे है इसमें दक्षिण एशिया का पहला स्थान है। 

दुनिया की लगभग 18 % आबादी के पास पहचान पत्र नहीं है।


बिना पहचान पत्र वाले लोगों में महिलाएं-------
देश                         महिलाएं(प्रतिशत)
माल्दोवा                      71.55
अल सल्वाडोर              57.32
स्लोवेनिया                 56.88
फलिस्तीन                 52.10
इटली                         51.64
फिनलैंड                      51.57
  
देश                           आबादी
भारत                        20.97 करोड़

नाइजीरिया                14.91 करोड़
अमेरिका                   9.50 करोड़
पाकिस्तान               8.30 करोड़
इथोपिया                  6.43  करोड़
बांग्लादेश                  4.20 करोड़
डी आर कांगो            3.39 करोड़

तंजानिया                  2.93 करोड़ 
साउदी अरब              2.31 करोड़
युंगाडा                    2.03 करोड़
चीन                       1.36 करोड़

प्रतिशत के हिस्सा हिस्सा से बिना पहचान वाले लोग------------
देश                         आबादी (प्रतिशत)
नाइजीरिया              77.77 
इरीट्रिया                     71.28
सउदी अरब                 70.79 
सोमालिया                     70.31
कुवैत                         68.50
मोनाको                       63.18
इथोपिया                      61.68
ओमान                        61.46
इंडिया                       लगभग 15


क्षेत्र के हिसाब से बिना पहचान पत्र वाले लोग---------
 क्षेत्र                   आबादी करोड़ में
अफ्रीका                   50.02
दक्षिण एशिया                35.70
मध्य पूर्व और उत्तरीय अफ्रीका---- 8.24 
पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र 7.21
लैटिन और मध्य अमेरिका-----4.55 
पूर्व और मध्य एशिया ------- 1.90 
अन्य                       2.45

विश्व बैंक ने आय के मुताबिक देशों को चार भागों में बांटा है जिनमें निम्न और मध्य आय वाले देशों के हालात सबसे ज्यादा खराब है।


 पहचान न होने के कारण
* गैर पंजीकृत लोग क्यों है-
  • कुछ लोगों को पंजीकरण का महत्व ही नहीं मालूम , जागरूकता के चलते   इनके बच्चे पहचान से महरूम हो जाते है।
  • कई देशों में पंजीकृत पाने की लागत ज्यादा है।
  • गरीबी और अशिक्षा 
  • पंजीकरण केन्द्र की दूरी
  • सरकारी दफ्तरों में जाने का डर
  • अधिकारियों के रवैया
  • भ्रष्टाचार
  • तंत्र में अविश्वास व रूढ़िवादिता
  • कुछ समूदायों के बीच लोगों को पहचान जाने का डर
  • सरकारी नीतियां
  • सरकारी भेदभाव तथा सुविधाएं छिननें का डर
गैर-पंजीकृत लोग कौन है---
  • अल्पसंख्यक 
  • अवैध प्रवासी
  • अनाधिकृत लोग
  • हिंसा पीड़ित
  • घुंमन्तू जातियां

आधार का इस्तेमाल-----------
बैंक खाते , लोन , पेंशन, मनी ट्रांसफर, टेक्स भुगतान, सामाजिक लाभ, नौकरी आदि.....

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर
 इसे 2010 में 15 राज्यों तथा दो केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वभाविक निवासियों के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर तैयार करने का काम शुरू हुआ। इसके लिए डाटा संकलन और एंट्री का काम भारत सरकार के आईटी विभाग को दिया गया। 62 करोड लोगों की पहचान से जुडी तमाम सूचनाएं शामिल की गयी। यह काम अक्टुबर 2013 में पूर्ण हो गया।
 भारत में पहचान के कानूनी प्रमाण -----------
  • जमीन के फोटो युक्त कागजात
  • पीओआई कार्ड, पैन कार्ड
  • जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • फोटो युक्त किसान बही
  • शस्त्र लाइसेंस, सरकारी विभागों से जारी पहचान पत्र
  • बैंक पासबुक , फोटो बैंक एटीएम कार्ड
  • स्वतंत्रता सेनानी पहचान पत्र
  • फोटो क्रेडिट कार्ड, शादी पंचीकरण
  • गजट नोटिफिकेशन, गैस कनेक्शन
  • दिव्यांग सर्टिफिकेट, पेंशनर कार्ड
  • सर्विस रिकार्ड पुस्तिका, वेतन की कापी
  • जाति व निवास प्रमाण पत्र
  • मतदाता पहचान पत्र
मतदाता पहचान पत्र------
निर्वाचन आयोग से जारी मतदाता पहचान पत्र भारत में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। देश में 18 साल से ज्यादा के लोग जो मतदाता के तौर पर पंजीकृत है। देश में 81.4 करोड़ मतदाताओं में से 95% वोटरों के पास वोटर आईडी है।
सर्वाजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले लाभ से जु़ड़ा राशन कार्ड लोगों को पंजीकरण और पहचान यह भी एक माध्यम है।   



दुनिया के देशों में पहचान तंत्र

1. थाईलैंड में लागू नेशनल आईडी नंबर में वहाँ की सरकार नें देश व्यापी स्वास्थ्य कवरेज हासिल कर लिया है। इससे वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

2. पेरू में यूनिवर्सल रजीस्ट्रेशन एंड पॉपुलेशन स्कीम के चलते प्राकृतिक आपदाओं में जरूरत मंदों तक मदद पहुंचाने में तेजी आई है।
3. पाकिस्तान में बायोमेट्रिक पहचान के व्यवस्या के बाद महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर में मदद मिली है।जिससे वह अपने अनुसार खर्च पाने की स्थित में आयी है।
4. भारत में आधार योजना के चलते सरकारी लाभ और सब्सिडी सीधे जरूरत मंदों के खातों में पहुँचने में मदद मिल रही है।           
 
  

क्यों आता है गुस्सा

               एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर(एपीडी)
  • एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर दस विभिन्न प्रकार के पर्सनेल्टी डिस्ऑडर में से एक है।
  • एंटीसोशल से तात्पर्य है एेसी गतिविधियों से है जो समाज के नियमों के विरूध , समाज को नुकसान पहुंचाने वाली होती है । इस रोग से पीडि़त व्यक्ति की सोच और व्यवहार दोनों ही दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाला होता है। एेसे लोग आपने लिए न तो दंड और न ही परिणाम की चिंता करते है और न ही पीड़ित व्यक्ति से किसी प्रकार की  सहानुभूति होती है।
  • कुछ एपीडी से पीड़ित लोगों  में मानसिक समस्याएं और सोंच दोष पूर्ण  पायी जाती है।
  • वंशानुगत मानसिक समस्या घटिया सोंच और उत्तेजनतापूर्ण व्यवहार का कारण हो सकती है।
  •  जिन लोगों में एपीडी वंशानुगत होता है। उन्हें आगर सही वातावरण और पालन पोषण न मिले तो यह समस्या काफी जटिल हो जाती है।

कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर

  • बच्चे और युवा अक्सर शरारते या दुर्व्यवहार करते है लेकिन कुछ बच्चों की आदतों में पाया जाता है।बच्चों और युवाओं में मिलने वाली यह एक भयानक समस्या है 

    कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर के में निम्न शामिल है ----    


    1.  झुठ बोलना
    2. चोरी करना
    3. बिना बताये चलेजाना
    4. जानवरों और लोगों के प्रति क्रुरता
    5. धमाका 
    6. मारपीट करना
    7. किसी हथियार से दूसरों को चोट पहुंचाना
    8. तोड़-फोड करना 
    9. आग लगाना आदि शामिल है।
    • इस रोग से पीड़ित बच्चे अकेले या समूह बनाकर हिंसा करते हैं।
  • इस रोग की शुरूआत बचपन से होती है आगे चलकर यही व्यवहार एपीडी का रूप धारण कर लेती है।
  • जहां एक ओर व्यवहार वंशानुगत जीनों से प्रभावित होता है और दूसरी ओर यही आस-पास के लोगों का व्यवहार(मारपीट, धुमक्कडी, टीवी पर फिल्में , वीडियो गेम्स आदि) भी इसके लिए जिम्मेदार होता है। 

न्यूरोट्रांस्मीटर रसायनों का व्यवहार पर प्रभाव

  • आक्रमक व्यवहार के लिए जिम्मेदार जीन क्रोमोसोम की छोटी भुजा पर स्थित होता है।  जीन मोनो एमीनोआक्सीडेस-ए नामक एंजाइम का काम तीन प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर रसायनों को तोड़ना होता है। जो तंत्रिका उद्दिपनों के प्रशारण को तेज और धीमा कर देता है। 1. नॉरएपीनोफ्राइन- रक्तचाप और शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाता है। 2. न्यूरोटॉस्मीटर
  • व्यवहार मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रण होता है। जीन, डीएनए के ट्रांस्क्रिप्सन और ट्रांसलेशन के जरिए मस्तिष्क के विकास दिशा देती है। मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाली जीनों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन , व्यवहार भी निर्धारित आनुवांशिक क्रियाओं को बदल या बिगाड़ सकता है। 
 
 

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