सोमवार, 7 मई 2018

दुनिया की 5 सबसे खतरनाक दवाएं

1. क्रोकोडिल

  • हैरोइन या अफीम का एक रूप है।
  • घरेलु रसायनों से रूस में बनती है जोकि एक काउंडर ड्रग के रूप में जानी जाती है।
  • आधिकारिक नाम- डेसोमोर्फिन
  • इस खतरनाक दवा के ओवर द काउंटर दर्द निवारकों की सहायता से रखा जा सकता है।
  • इसके सेवन से मानव शरीर से मांस लगभग खत्म हो जाता है और हड्डियां गल जाती है।

2. स्कोपोलैमाइन


  • यह अपराधियों द्वारा सबसे ज्यादा उपयोग में लाई जाने वाली दवा
  • मुख्यता इसका इस्तेमाल कोलंबिया में होता है। इसको शैतान का श्वास कहा जाता है। क्योंकि यह आसानी से वितरित हो जाती है। यदि कोई अपराधी अगर इसे अपने चेहरे पर इसको फेंक देता है या उड़ा देता है तो वह अपने मूल रूप से लगभग 24 घंटे के लिए आत्म नियंत्रण और जागरूकता को खो देता है। इसको लेने से व्यक्ति चीजों को भूलने लगता है अर्थात् उसको एम्नेसिया हो जाता है।
3.नटमेग

  • मनोवैज्ञानिक बीमारी, मतिभ्रम, मांसपेशियों की ऐठन, अधिक मुत्रस्राव, अधिक बेचैनी।
  • यह मतियुगजल्य है। इससे ह्रदय की गति बढ़ जाती है।

4. मानव विकास हार्मोन

यह एथलीटो में लोकप्रिय माना जाता है। एक्रोमेगाली नामक हालात को जन्म देने के लिए जाना जाता है । जिसके कारण त्वचा मोटी हो जाती है।

दातों में गैप

इस दवा को मृत शरीर से बनाया जाता है। जिसके कारण क्रुतजेल्फेट - जाकोब रोग हो जाता है। यह रोग पागल गाय के समान है लेकिन यह पागल मानव रोग है।

5. डीनीटरोफिनॉल

यह वज़न घटाने के लिए उपयोग की जाती है। इसका आविष्कार 1930 में हुआ। व्यक्ति के शरीर से वसा जलाने के साथ ही शरीर में एसिड की मात्रा को बढ़ा देती है।

नासा द्वारा मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए इनसाइट मिशन लांच



  • दो मिनी सेटेलाइटों के साथ ‘इनसाइट’ यान का प्रक्षेपण किया।
  • यह यान इस साल के नवंबर महीने में मंगल पर उतरेगा
  • एटलस-पांच रॉकेट के माध्यम से इस यान का कैलिफोर्निया के वैंडनबर्ग एयर फोर्स स्टेशन से सफल प्रक्षेपण किया गया.
  • नासा के अध्यक्ष जिम ब्रिडेंस्टाइन

Insight mission

  • इस यान द्वारा मंगल के तापमान का पता लगाने के लिए 16 फुट तक खुदाई की जायेगी
  • इस आभियान की विशेषता - एक रोबोटिक जियोलॉजिस्ट (रोबोट भूविज्ञानी) भी भेजा गया है और यही मंगल की सतह पर गहरी खुदाई करके सतह पर होने वाले कंपनों को मापेगा.
  • मंगल की आंतरिक संरचना की गहराई से अध्ययन करेगा.
  •  वैज्ञानिकों का अनुमान मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा के पास दिन का ग्रीष्मकालीन तापमान 70 डिग्री फोरेनहाइट (20 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है, लेकिन फिर रात से -100 फोरेनहाइट (-73 सेल्सियस) तक पहुंच जाता है.
  • इनसाइट में अति-संवेदनशील सेस्मोमीटर लगा है- यह मंगल पर भूकंप की स्थिति का पता लगायेगा
  1. नासा मंगल ग्रह से पर्दा उठाने के लिए कई रोवर भेज चुकी है. उसने वर्ष 2003  में ‘अपॉरच्युनिटी’ और वर्ष 2011  में ‘क्यूरियोसिटी’ रोवर मंगल पर भेजा था.

https://mars.nasa.gov/insight/
 

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