शनिवार, 23 दिसंबर 2017

                   कुपोषण और भूंखमरी

  • जीना हर बच्चे और हर शिशु का अधिकार है कोई भी मौत उसके नैसर्गिक अधिकार का हनन है।
    अमेरिका स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की तरह से जारी किए जाने वाले इस सूचकाक के जरिए  भूखमरी और कुपोषण का आकलन किया जाता है।
    •  ग्लोबल इंडेक्स ज्यादा होेने का मतलब है उस देश में भूख की समस्या अधिक है 
    इसे नापने का चार प्रमुख पैमाने- 
  1. कुपोषण
  2. शिशुओं में भयांकर कुपोषण
  3. बच्चों के विकास में रुकावट 
  4. बाल मृत्यु दर
  • भारत में फाइट हंगर फांउडेशन और एसीएफ इंडिया ने मिलकर जनरेशनल न्यूट्रिशन प्रोग्राम की शुरूआत की।
  • विश्व बैंक ने कुपोषण की तुलना ब्लेैक डेथ नामक महामारी से की है। जिसने 18वीं सदी में यूरोप की जनसंख्या के एक बडे हिस्से को निगल लिया ता।ॉ
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                                          Kanyakumari

 Kanyakumari (alter Name: Cape Comorin)


  •  यह हिन्द महासागर , बंगाल की खाड़ी  और अरब सागर का मिलन स्थल है। 
  • कन्याकुमारी अम्मन मंदिर- यह मंदिर पार्वती को समर्पित है।  तीनों समुद्रों के संगम स्थल पर स्थित है।  भक्तजन मंदिर में प्रवेश करने से पहले त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाते है। मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार हमेशा बंद करके रखा जाता है। क्योंकि मंदिर में स्थापित देवी के आभूषण की रोशनी से समुद्री जहाज इसे लाइटहाउस समझने की भूल कर बैठते है जिससे जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है।
  • गांधी स्मारक- 
  • यहां महात्मा गांधी की चिता की राख रखी हुई है। इस स्मारक की स्थापना 1956 में हुई थी। महात्मा गांधी 1937 में यहां आए थे। उनकी मृत्यु के बाद 1948 में कन्याकुमारी में ही उनकी अस्थियां विसर्जित की गई थी। स्मारक को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि  महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर सूर्य की प्रथम किरण  उस स्थान पर पड़ती है जहां उनकी राख रखी हुई है।
  • तिरूवल्लूवर मूर्ति- तिरूक्कुरुल की रचना करने वाले अमर तमिल कवि तिरूवल्लुवर  की यह प्रतिमा पर्यटकों को बहुत लुभाती है । 38 फीट ऊंची आधार पर बनी, 95 फीट की है इसकी कुल ऊंचाई-133 फीट इसका वजन-2000 टन , कुल 1283 पत्थरों  के टुकड़े उपयोग किये गये।
  • विवेकानन्द रॉक मेमोरियल- इस स्थान को श्रीपद पराई के नाम से भी जाना जाता है। यहां विवेकानन्द जी ध्यान लगाया था। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर कन्याकुमारी ने भी तपस्या की थी।  कहा जाता है कि यहां कुमारी देवी के पैरों के निशान मुद्रित हैं।  इस स्मारक के दो हिस्से है 1. विवेकानन्द मंडपम 2. श्रीपद मंडपम

                                       तिरुवनन्तपुरम

  • केरल की राजधानी

    • महात्मा गांधी जी ने इस नगर को भारत का सदाबहार नगर  की संज्ञा दी।
    • इस शहर का नाम शेषनाग अनंत  के नाम पर पड़ा जिनके ऊपर पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु) विश्राम करते है। 
    • 1956 में केरल राज्य के बनने के बाद से यह केरल राज्य की राजधानी है।
    • यही पद्मानाभस्वामी का मंदिर है जो करिब 2000 साल पुराना है। यह मंदिर केरल और द्रविडि़यन वास्तुशिल्प में निर्मित है । इस मंदिर में केवल हिन्दू ही प्रवेश करते है। पुरुष यहां केवल सफेद धोती पहन कर यहां आ सकते है।
    • यह भारत के केरल राज्य के दक्षिणी -पश्चिमी तट पर स्थित है।
    • देशान्तर 76.9 डिग्री तथा अक्षांश8.5 डिग्री
    • जनवरी का तापमान- 29 से 23 के बीच
    • तिरूवनंतपुरम वेधशाला- इसका निर्माण महाराजा स्वाति तिरूल ने 1837 में इसका निर्माण करवाया था। यह भारत की सबसे पुरानी वेधशालाओं में से एक है। 
    • चिड़ियाघर- पीएमजी जंक्शन के पास स्थित यह चिड़ियाघर भारत का दूसरा सबसे पुराना चिड़ियाघर है। इसका निर्माण 1857 में हुआ था। रैप्टाइस हाउस में सांपों की अनेक प्रजातियां रखी गई है। 
    • नेपियर संग्रहालय- लकडी से बनी यह आकर्षक इमारत शहर के उत्तर में म्यूजियम रोड पर स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने संग्रहालयोें में से एक है। इसका निर्माण 1855 में हुआ। मद्रास के गवर्नर लॉर्ड चाल्स नेपियर  के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया।
    • चाचा नेहरू बाल संग्रहालय़- इसकी स्थापना 1980 में हुई। यह सिटी सेन्ट्रल बस स्टेशन से 1 किमी  उत्तर में स्थित है। 
    • कोवलम बीच - यह तिरूवनंतपुरम से 16 किमी दूर स्थित  कोवलम बीच है जो रेतीले तटों पर नारियल के पेडों और खूबसूरत लैगून से सजे ये बीच पर्यटकों को लुभाते है।  इसके दक्षिणी छोर पर स्थित लाइट बीच सबसे ज्यादा आकर्षित करता है।  यह विश्व  के सबसे खुबसूरत तटों में से एक है। 
      • Veli LaKE
         PONMUDI HILL
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रविवार, 5 नवंबर 2017

जिंदा होकर भी जिंदा नहीं

बिना पहचान के लोग
विश्व बैंक ने कहा कि दुनिया भर में 110 करोड़ लोग एेसे है जो अधिकारिक तौर पर दुनिया में हैं ही नहीं । यानी कि उन लोगों की कोई पहचान नहीं है। ये लोग बिना किसी पहचान, प्रमाण के जींदगी गुजार रहे है।

 विश्व बैंक को विकास के लिए  पहचान कार्यक्रम के तहत यह जानकारी प्राप्त हुई है ।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 1/3 संख्या बच्चों की है जिनका जन्म के समय पंजीकरण नहीं हुआ।


बिना पहचान पत्र वाले लोगः
  • 78  उपसहारा अफ्रीका और एशिया में हैा
  •  40% आबादी  18 साल से कम उम्र के लोगों की 
  • 5 साल का हर छठा बच्चा बिना पहचान का 
  • विश्व बैंक के मुताबिक दुनिया में बिना पहचान के जीने वाले लोगों की संख्या भारत में है। 
आयवर्ग                       आबादी करोड़ में
निम्न मध्य आय             59.93  
निम्न आय                 34.00
उच्च मध्य आय            9.59

उच्च आय वाले देशों में बिना पहचान के  जी रहे है। उसी सूची में अफ्रीका पहले पायदान पर है।उच्च मध्य आय वाले देशों में बिना पहचान के जी रहे है इसमें दक्षिण एशिया का पहला स्थान है। 

दुनिया की लगभग 18 % आबादी के पास पहचान पत्र नहीं है।


बिना पहचान पत्र वाले लोगों में महिलाएं-------
देश                         महिलाएं(प्रतिशत)
माल्दोवा                      71.55
अल सल्वाडोर              57.32
स्लोवेनिया                 56.88
फलिस्तीन                 52.10
इटली                         51.64
फिनलैंड                      51.57
  
देश                           आबादी
भारत                        20.97 करोड़

नाइजीरिया                14.91 करोड़
अमेरिका                   9.50 करोड़
पाकिस्तान               8.30 करोड़
इथोपिया                  6.43  करोड़
बांग्लादेश                  4.20 करोड़
डी आर कांगो            3.39 करोड़

तंजानिया                  2.93 करोड़ 
साउदी अरब              2.31 करोड़
युंगाडा                    2.03 करोड़
चीन                       1.36 करोड़

प्रतिशत के हिस्सा हिस्सा से बिना पहचान वाले लोग------------
देश                         आबादी (प्रतिशत)
नाइजीरिया              77.77 
इरीट्रिया                     71.28
सउदी अरब                 70.79 
सोमालिया                     70.31
कुवैत                         68.50
मोनाको                       63.18
इथोपिया                      61.68
ओमान                        61.46
इंडिया                       लगभग 15


क्षेत्र के हिसाब से बिना पहचान पत्र वाले लोग---------
 क्षेत्र                   आबादी करोड़ में
अफ्रीका                   50.02
दक्षिण एशिया                35.70
मध्य पूर्व और उत्तरीय अफ्रीका---- 8.24 
पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र 7.21
लैटिन और मध्य अमेरिका-----4.55 
पूर्व और मध्य एशिया ------- 1.90 
अन्य                       2.45

विश्व बैंक ने आय के मुताबिक देशों को चार भागों में बांटा है जिनमें निम्न और मध्य आय वाले देशों के हालात सबसे ज्यादा खराब है।


 पहचान न होने के कारण
* गैर पंजीकृत लोग क्यों है-
  • कुछ लोगों को पंजीकरण का महत्व ही नहीं मालूम , जागरूकता के चलते   इनके बच्चे पहचान से महरूम हो जाते है।
  • कई देशों में पंजीकृत पाने की लागत ज्यादा है।
  • गरीबी और अशिक्षा 
  • पंजीकरण केन्द्र की दूरी
  • सरकारी दफ्तरों में जाने का डर
  • अधिकारियों के रवैया
  • भ्रष्टाचार
  • तंत्र में अविश्वास व रूढ़िवादिता
  • कुछ समूदायों के बीच लोगों को पहचान जाने का डर
  • सरकारी नीतियां
  • सरकारी भेदभाव तथा सुविधाएं छिननें का डर
गैर-पंजीकृत लोग कौन है---
  • अल्पसंख्यक 
  • अवैध प्रवासी
  • अनाधिकृत लोग
  • हिंसा पीड़ित
  • घुंमन्तू जातियां

आधार का इस्तेमाल-----------
बैंक खाते , लोन , पेंशन, मनी ट्रांसफर, टेक्स भुगतान, सामाजिक लाभ, नौकरी आदि.....

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर
 इसे 2010 में 15 राज्यों तथा दो केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वभाविक निवासियों के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर तैयार करने का काम शुरू हुआ। इसके लिए डाटा संकलन और एंट्री का काम भारत सरकार के आईटी विभाग को दिया गया। 62 करोड लोगों की पहचान से जुडी तमाम सूचनाएं शामिल की गयी। यह काम अक्टुबर 2013 में पूर्ण हो गया।
 भारत में पहचान के कानूनी प्रमाण -----------
  • जमीन के फोटो युक्त कागजात
  • पीओआई कार्ड, पैन कार्ड
  • जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • फोटो युक्त किसान बही
  • शस्त्र लाइसेंस, सरकारी विभागों से जारी पहचान पत्र
  • बैंक पासबुक , फोटो बैंक एटीएम कार्ड
  • स्वतंत्रता सेनानी पहचान पत्र
  • फोटो क्रेडिट कार्ड, शादी पंचीकरण
  • गजट नोटिफिकेशन, गैस कनेक्शन
  • दिव्यांग सर्टिफिकेट, पेंशनर कार्ड
  • सर्विस रिकार्ड पुस्तिका, वेतन की कापी
  • जाति व निवास प्रमाण पत्र
  • मतदाता पहचान पत्र
मतदाता पहचान पत्र------
निर्वाचन आयोग से जारी मतदाता पहचान पत्र भारत में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। देश में 18 साल से ज्यादा के लोग जो मतदाता के तौर पर पंजीकृत है। देश में 81.4 करोड़ मतदाताओं में से 95% वोटरों के पास वोटर आईडी है।
सर्वाजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले लाभ से जु़ड़ा राशन कार्ड लोगों को पंजीकरण और पहचान यह भी एक माध्यम है।   



दुनिया के देशों में पहचान तंत्र

1. थाईलैंड में लागू नेशनल आईडी नंबर में वहाँ की सरकार नें देश व्यापी स्वास्थ्य कवरेज हासिल कर लिया है। इससे वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

2. पेरू में यूनिवर्सल रजीस्ट्रेशन एंड पॉपुलेशन स्कीम के चलते प्राकृतिक आपदाओं में जरूरत मंदों तक मदद पहुंचाने में तेजी आई है।
3. पाकिस्तान में बायोमेट्रिक पहचान के व्यवस्या के बाद महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर में मदद मिली है।जिससे वह अपने अनुसार खर्च पाने की स्थित में आयी है।
4. भारत में आधार योजना के चलते सरकारी लाभ और सब्सिडी सीधे जरूरत मंदों के खातों में पहुँचने में मदद मिल रही है।           
 
  

क्यों आता है गुस्सा

               एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर(एपीडी)
  • एंटीसोशल पर्सनेल्टी डिस्ऑडर दस विभिन्न प्रकार के पर्सनेल्टी डिस्ऑडर में से एक है।
  • एंटीसोशल से तात्पर्य है एेसी गतिविधियों से है जो समाज के नियमों के विरूध , समाज को नुकसान पहुंचाने वाली होती है । इस रोग से पीडि़त व्यक्ति की सोच और व्यवहार दोनों ही दूसरों को पीड़ा पहुंचाने वाला होता है। एेसे लोग आपने लिए न तो दंड और न ही परिणाम की चिंता करते है और न ही पीड़ित व्यक्ति से किसी प्रकार की  सहानुभूति होती है।
  • कुछ एपीडी से पीड़ित लोगों  में मानसिक समस्याएं और सोंच दोष पूर्ण  पायी जाती है।
  • वंशानुगत मानसिक समस्या घटिया सोंच और उत्तेजनतापूर्ण व्यवहार का कारण हो सकती है।
  •  जिन लोगों में एपीडी वंशानुगत होता है। उन्हें आगर सही वातावरण और पालन पोषण न मिले तो यह समस्या काफी जटिल हो जाती है।

कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर

  • बच्चे और युवा अक्सर शरारते या दुर्व्यवहार करते है लेकिन कुछ बच्चों की आदतों में पाया जाता है।बच्चों और युवाओं में मिलने वाली यह एक भयानक समस्या है 

    कन्डेक्ट डिस्ऑर्डर के में निम्न शामिल है ----    


    1.  झुठ बोलना
    2. चोरी करना
    3. बिना बताये चलेजाना
    4. जानवरों और लोगों के प्रति क्रुरता
    5. धमाका 
    6. मारपीट करना
    7. किसी हथियार से दूसरों को चोट पहुंचाना
    8. तोड़-फोड करना 
    9. आग लगाना आदि शामिल है।
    • इस रोग से पीड़ित बच्चे अकेले या समूह बनाकर हिंसा करते हैं।
  • इस रोग की शुरूआत बचपन से होती है आगे चलकर यही व्यवहार एपीडी का रूप धारण कर लेती है।
  • जहां एक ओर व्यवहार वंशानुगत जीनों से प्रभावित होता है और दूसरी ओर यही आस-पास के लोगों का व्यवहार(मारपीट, धुमक्कडी, टीवी पर फिल्में , वीडियो गेम्स आदि) भी इसके लिए जिम्मेदार होता है। 

न्यूरोट्रांस्मीटर रसायनों का व्यवहार पर प्रभाव

  • आक्रमक व्यवहार के लिए जिम्मेदार जीन क्रोमोसोम की छोटी भुजा पर स्थित होता है।  जीन मोनो एमीनोआक्सीडेस-ए नामक एंजाइम का काम तीन प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर रसायनों को तोड़ना होता है। जो तंत्रिका उद्दिपनों के प्रशारण को तेज और धीमा कर देता है। 1. नॉरएपीनोफ्राइन- रक्तचाप और शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाता है। 2. न्यूरोटॉस्मीटर
  • व्यवहार मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रण होता है। जीन, डीएनए के ट्रांस्क्रिप्सन और ट्रांसलेशन के जरिए मस्तिष्क के विकास दिशा देती है। मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाली जीनों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन , व्यवहार भी निर्धारित आनुवांशिक क्रियाओं को बदल या बिगाड़ सकता है। 
 
 

शनिवार, 28 अक्टूबर 2017

विश्व संसद

                    संयुक्त राष्ट्र

  • हर साल 24 अक्टुबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है। इसदिन दुनिया भर के देश वैश्विक शांति, विकास और सहयोग का संकल्प लेते है।
  • वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव - एंटोनियो गुटेरेज
  • इसका मुख्यालय-  न्यूयार्क 
  • 24  अक्टुबर 1945 को दुनिया के 50 देशों ने यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर किये। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में आया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर-
  • 1945 में स्वीकृत संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आने वाली पीढियों को युद्ध से बचाने , आम लोगों के मानवाधिकारों  की रक्षा, बडे़ और छोटे राष्ट्रों को समान अधिकार, अन्तर्राष्ट्रीय न्याय और सम्मान, सामाजिक प्रगति और अच्छा जीवन स्तर , एक दूसरे से सहयोग की भावना, सामान्य हित में ही सशस्त्र बल के प्रयोग जैसी अहम बातों को शामिल किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र दिवस पर पहली बार 1971 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अन्तर्राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया।
  •  अमेरिका ने 1942 में ही 26 देशों के साथ मिलकर एक समझौता किया । और वही से संयुक्त राष्ट्र की राह खुली । आखिरकार 24 अक्टुबर 1945 को यूएन की स्थापना हुई।
  • 4-11 फरवरी 1945 के बीच अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने मिलकर एक सम्मेलन किया। सम्मेलन में उस वक्त के तीन सबसे शक्तिशाली - 1.  अमेरिका के राष्ट्रपति -फ्रेन्कविन रूजविल्ट, 2. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री - विन्सटल चर्चिल  और 3. सोवियत संघं -मार्शल जोसेफ स्टोलेन  ने इसी बैठक में यूएन में स्थाई सदस्य का बीज  वोया गया। तीनों मुल्क इस बात पर सहमत हुए कि संयुक्त राष्ट्र के भीतर तीनों को वीटो का अधिकार प्राप्त होगा।
  • जब 24 अक्टुबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का एेलान हुआ तब स्थाई सदस्यों की सूची में दो और देश शामिल हुए  जिसनें फ्रांस और चीन । लेकिन 1971 तक ताइवान भी चीन के रूप में संयुक्त राष्ट्र का स्थाई सदस्य रहा।
  • 1971 क चीन को यूएन ने मान्यता दी तब से मौजूदा चीन सुरक्षा परिषद का सदस्य है।
  • 1946-58 के बीच तक फ्रांस में भी सत्ता के बदलाव के चलते दो बार देश का नाम बदलना पड़ा लेकिन 1958 में मौजूदा फ्रांस को यूएन का स्थाई सदस्य माना जा रहा है।
  • 24 अक्टुबर 1945 को जब यू एन की स्थापना हुई थी तब इसमें उस समय 51 सदस्य थे जो वर्तमान समय में  193 सदस्य है।
संयुक्त राष्ट्र के कई अंग-
1. महासभा- नीतिगत फैसला लेने का काम, हर साल सितंबर में न्यूयार्क में बैठक होती है, शांति , सुरक्षा और सदस्यता जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।
2.सुरक्षा परिषद- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद की है।, इसमें पांच स्थायी  और 10 अस्थाई सदस्य है।
3. यूनेस्को परिषद- आर्थिक, सामाजिक , पर्यावरण के मुद्दों पर सदस्य देशों से बातचीत और नीतिगत फैसले का काम यूएन का है। सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र का सबसे कारगर संगठन यूनेस्को है।

4. न्यास परिषद-संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय न्यास परिषद की भी स्थापना हुई थी। इसका काम था कि 11 प्रान्तों की देखभाल करना था लेकिन ये प्रान्त धीरे-2 सभी आजाद हो गये तो 1994 में इसके काम-काज को बंद कर दिया गया ।
5. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय- संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिक संगठन है यह एेसा संगठन है जिसका मुख्यालय न्यूयार्क से बाहर नीदरलैंड के द् हेग में है।
6. सचिवालय-  संयुक्त राष्ट्र के बाकी सभी सगठनों के काम-काज की जिम्मेदारी सचिवालय के ऊपर है।

 संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियां-----------
  • जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता
  • ओजोन परत को बचाने
  • मिस्त्र के पिरामिड समेत कई विश्व धरोहरों की रक्षा 
  • पोलियो, खसरा, एड्स और इबोला जैसी बीमारियों के खात्में
  •  इराक,अफगानिस्तान और श्रीलंका में निष्पक्ष चुनाव कराने
  • सीरिया, लेबनान, सूडान,अफगानिस्तान और लीबिया के लाखों शरणर्थियों की मदद
  • कोसोवो , उत्तरी कोरिया, सूडान , सेन्ट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और हैती समेत कई देशों में शांति मिशन पिछले 70 सालों में संयुक्त राष्ट्र की बढी उपलब्धियां माना जा सकताी है।
  • इस संस्था ने 1956 में स्वेज नहर संकट, एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद की प्रक्रिया को रोकने में अपनी भूमिका निभाई।
  • अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच शांति युद्ध को कम करने के लिए काम किया।
  • 1962 का  क्यूबा मिसाइल संकट समेत कई एेसे संकट आये जब यूएन ने शांति बनाये रखने में अहम भूमिका निभाई।
  • सीरिया के लाखों शरणर्थियों का टुर्की, लेबनान, और जार्डन जैसे पडोसी देशों में पुर्नर्वास में भी सहयोग किया।
  • अफ्रीका में जारी संघर्ष को हल करने के लिए शांति मिशनों की शुरूआत की ।
  • विकास की अवधारणा को बढा़वा दिया।
  • मानवाधिकारों को प्रोत्साहन 
  • समाज  के विकास के लिए नागरिकों की क्षमताओं का बढा़या।
नाकामियांःःःःःःःःःःःःःःः
  • पिछले 50 सालों में कई एेसे मौके आये जब इसकी भूमिका पर सवाल उठे
  • इस दौरान फलीस्तीन , म्यांमार, बोस्निया हिंसा, सूडान और सीरिया मेंं नरसंहार रोकने में नाकाम रहा।
  • शासक वर्ग के अत्याचार, मजबूत देशों की मनमानी और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कोई मजबूत कदम नहीं उठा सका।
  • इराक पर अमेरिकी हमला, लीबिया में पश्चिमी देशों के कार्यवाही , अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं की मौजूदगी, यमन में सउदी गठबंधन सेनाओं के आम नागरिकों पर हमले , सीरिया में मजबूत देशों के मनमाने फैसले , और म्यांमार मामले है जहाँ यूए नाकाम रहा। 
 सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता में भारत की चुनौतियाँःःःःः
  • संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता के लिए दुनिया की बडी शक्तियाँ भारत के समर्थन में सामने आयी है।
  • फ्रांस , ब्रिटेन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ऐसे स्थाई सदस्य है जो पहले से ही भारत के दावे को समर्थन देते रहे है।
  • अमेरिका और चीन भारत का समर्थन नहीं करते थे लेकिन अमेरिका ने अब खुलकर भारत की दाबेदारी को समर्थन देना शुरू किया है। चीन भी कई बार भारत के पक्ष में बय़ान दे चुका है।
  • स्थाई सदस्यता के लिए भारत के अलावा जर्मनी, जापान और ब्राजील भी दाबेदारी मजबूत है भारत और इन तीन देशों ने जी-4 का गठन इसी मकसद से किया है। जी-4 सभी अपने देशों की स्थाई सदस्यता चाहता है।
  • अर्जेन्टीना, इटली , कनाडा , कोलंबिया और पाकिस्तान ने जी-4 की कोशिशो को नाकाम करने के लिए जुलाई 2005 में काफी का गठन किया । यह मंच मौजूदा पांच देशों की स्थाई सदस्यता को सुरक्षित रखने का पक्षधर है। इस गठन का नेतृत्व पाकिस्तान और इटली के हाथों में है।भारत को लेकर चीन ने कोई विराध नहीं किया लेकिन इस कलव को सराहना दी।


  


     

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची  By Anurag  आम रोगों और प्राथमिकता वाले रोगों के निदान के लिए आवश्यक परीक्षणों की एक सूची ...