शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017

नदी जोड़ो परियोजना

                    नदी जोड़ो परियोजना

  • NWDA स्थापना -1982
  • सबसे पहले- केन-बेतवा नदियों 
  1. 7 बांध बनाने वाले है
  2. 10 हजार हेक्टेयर भूमि
  3. पर्यावरणविदों का मानना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घडियाल अभ्यारण्य खत्म हो जायेगा।
  4. उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश और केन्द्र सरकार के बीच 25 अगस्त 2005 में सहमित बनी.

नदी जोड़ो परियोजना

  1. देश भर 30 रिवर लिंक चिन्हित 
    • हिमालयी नदियों के बीच 14 लिंक
    • प्रायद्वीपीय भारत में 16 लिंक
    • प्रायद्वीप घटक में 14 और हिमालयी घटक में 2 साध्यता रिपोर्ट पूरी हो चुकी है।

    विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार 

    नदी लिंक             तारीख

    केन-बेतवा              अप्रैैल 2010

    दमनगंगा-पिंजाल           जनवरी 2014

    पार-तापी-नर्मदा         मार्च 2014

    महानदी-गोदावरी         अगस्त 2015

    • 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने नदी जोडो परियोजना पर फैसला दिया

      • संविधान के अनुच्छेद 246 और अनुसूची 7 के तहत पानी पर राज्य का अधिकार है।

        गंगा एक्शन प्लान

        • 1986 में गंगा एक्शन प्लान की शुरूआत हुई 
          9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने के बाद लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया और अंत में 2000 में परियोजना को बंद कर दिया गया।
          • विश्व में उपलब्ध पानी का मात्र 4% भारत में है जबकि दुनिया में आबादी का लगभग 18% है।

          नदी जोड़ो परियोजना का सफर

          • 1858 में नदियों को जोडने का विचार मद्रास प्रेसिडेंसी के मुख्य इंजीनियर आर्थर कॉटोन का विचार 
            • दक्षिण-पूर्व में नदियों में माल की आवाजाही और सूखे की समस्या खत्म करने की सोच सामने आयी।
            • कहा जाता है कैप्टन दस्तूर ने रूपरेखा तैयार की ।
            स्वतंत्रता के बाद
          • 1960 में केएल राव(केन्द्रीय ऊर्जा और सिंचाई राज्य मंत्री)ने गंगा और कावेरी नदियों  को जोडने का प्रस्ताव रखा
          • 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदरा गाँधी के कार्यकाल में जल संसाधन मंत्रालय की ओर से जल विकास के लिए एक राष्ट्रीय परिद्दश्य तैयार किया गया।
          • 1982 में नेशनल वॉटर डेवलपमेंट एजेंसी का गठन 
          • 1999 में एकीकृत जल संसाधन विकास योजना रिपोर्ट पेश हुई जिसमें नदी जोड़ योजना पर विशेष सलाह दी गई।
          • 2002 में देश में बढा सूखा पडा
          • 15 अगस्त 2002 को तत्कालीन राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोध में भारत में नदियों को जोड़ने की आवश्यकता बताई।
          • अक्टुबर 2002 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश
          • दिसंबर 2002 में सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में कार्यदल का गठन किया गया। मार्च 2004 में पद से इस्तीफा दे दिया।
          • 2002 - पूर्व न्यायाधीश ने मात्र सलाह बताया
          नरेन्द्र मोदी सरकार
          • 2       जुलाई 2014 - विशेष समिति के गठन को मंजूरी
          • 17 अक्टुबर 2014 - समिति की पहली बैठक
          • 20-22 नबंवर 2014 - जल मंथन में व्यापक विचार -नदियों को जोड़ने पर व्यापक विचार हुआ
          • 22-23 फरवरी 2016- दूसरी बैठक
          • 2015 के इंडिया वॉटर वीक में विचार
          • 2016 के इंडिया वॉटर वीक पर गम्भीर चर्चा हुई।       

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