तंबाकू से निजात दिलाने की चुनौती
- वर्ल्ड नो टोबैको डे के मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की यह बताती है कि तंबाकू की खेती के लिए भारत में 1962-2002 के बीच 1700 हेक्टेयर सालाना की दर से वनों का नाश किया गया।
- तंबाकू के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल 1.4 लाख करोड डॉलर की चपत लगती है।
- तंबाकू से हर साल दुनिया भर के देशों को उत्पादन शुल्क के रुप में 270 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त होता है।
- खेतों में काम करने वालों में 60 70 फीसदी महिलाएं है।
- तंबाकू से निकलने वाले कचरे में 7000 जहरीले तत्व पाये जाते है।
- 70 लाख तंबाकू से दुनिया भर में होने वाली मौते
- 10 लाख इसके चलते हर साल जान गवाते है भारतीय
तंबाकू उत्पादन में दुनिया में अब्वल देश
- चीन - 3148547 टन ( कुल वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी- 42.3%)
- ब्राजील- 850673 टन (11.4%)
- भारत - 830000 टन (11.1%)
- अमेरिका- 345837टन (4.6%)
- इंडोनेशिया- 260200टन (3.6%)
- डब्ल्यू एच ओ के मुताबिक तंबाकू के सेवन से प्रतिवर्ष 60 लाख लोगों की मौते होती है।
- दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों में 30 मौते तंबाकू उत्पादों से सेवन से होती है।
- 2014 की कनाडियन कैंसर सोसाइटी की एक रिपोर्ट ने पाया कि चेतावनी के आकार के मामले में 198 देशों की सूची में भारत का 136वां स्थान था जबकि 2012 में 123वां स्थान था।
- स्वास्थ्य मंत्रालय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार- वर्ष 2011 में केवल तंबाकू जतिन बीमारियों के इलाज पर देश के सकल घरेलू उत्पादन का 1.16 फीसदी खर्च हुआ।
- प्रसिद्ध मेडिकल जनरल लैसेट की एक रिपोर्ट बताती है कि चालीस फीसदी बच्चों और तीस फीसदी से अधिक महिलाओं -पुरूषों पर सेकेंड धुम्रपान का घातक प्रभाव पड़ता है।

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