सोमवार, 3 जून 2019

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची  By Anurag 

  • आम रोगों और प्राथमिकता वाले रोगों के निदान के लिए आवश्यक परीक्षणों की एक सूची 'आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची' (essential diagnostic list) प्रकाशित की है
  • सूची में विभिन्न प्रकार के डायग्नोस्टिक्स के लिए लागू डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देशों की जानकारी भी शामिल है और बताया गया है कि किसी विशेष श्रेणी में डब्ल्यूएचओ प्रीक्वॉलीफाइड उत्पाद उपलब्ध हैं या नहीं.
उद्देश्य
  • डायग्नोस्टिक सेवाओं तक पहुंचने में लोगों की अक्षमता (inability) को दूर करना है,
  • यह सूची डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवा सूची (ईएमएल) के समान है, जिसे 1977 से हर दो साल में बदला जाता है. यह सूची महत्वपूर्ण दवाओं के खरीद निर्णय लेने के लिए दुनिया भर के स्वास्थ्य प्राधिकरणों द्वारा संदर्भ के रूप में उपयोग की जाती है.
घोषणा की मुख्य विशेषताए
  • आवश्यक निदान परीक्षण में रक्त और मूत्र परीक्षण समेत 58 परीक्षण शामिल हैं.
• अन्य 55 परीक्षणों में एचआईवी, टीबी, मलेरिया, हेपेटाइटिस बी और सी आदि का पता लगाने और जांच करने को शामिल किया गया है.
• आवश्यक निदान परीक्षण सूची में रक्त जांच और मूत्र परीक्षण आदि पर जोर दिया गया है.
प्राथमिक बीमारियां जैसे ट्यूबरक्युलोसिस,मलेरिया, एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, सिफिलिस और मानव पेपिलोमावायरस की पहचान, निदान और निगरानी हेतु 55 परीक्षण होते हैं.
• इस संबंध में डब्ल्यूएचओ नियमित आधार पर सूची अपडेट करेगा और अगले संस्करण में श्रेणियों (categories) को जोड़ने हेतु आवेदन जारी करेगा.
क्यों आवश्यक है?
विश्व निकाय की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि एक अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित 46 फीसदी वयस्क लोगों के रोग का निदान नहीं हो पाता. इस स्थिति में उन्हें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है और उन्हें सेहत पर अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है. डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी जानकारी में कहा गया कि एचआईवी और टीबी जैसे संक्रामक रोगों का विलंब से निदान होने से इन रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है और उनका उपचार कठिन हो जाता है.
डब्ल्यूएचओ
गठन 7 अप्रैल 1948
इससे पूर्व मौजूद स्वास्थ्य संगठन के स्थान पर इसे लाया गया था जो लीग ऑफ नेशंस की एक एजेंसी थी.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य पर एक समन्वय प्राधिकारी के रूप में कार्य करती है



सोमवार, 7 मई 2018

दुनिया की 5 सबसे खतरनाक दवाएं

1. क्रोकोडिल

  • हैरोइन या अफीम का एक रूप है।
  • घरेलु रसायनों से रूस में बनती है जोकि एक काउंडर ड्रग के रूप में जानी जाती है।
  • आधिकारिक नाम- डेसोमोर्फिन
  • इस खतरनाक दवा के ओवर द काउंटर दर्द निवारकों की सहायता से रखा जा सकता है।
  • इसके सेवन से मानव शरीर से मांस लगभग खत्म हो जाता है और हड्डियां गल जाती है।

2. स्कोपोलैमाइन


  • यह अपराधियों द्वारा सबसे ज्यादा उपयोग में लाई जाने वाली दवा
  • मुख्यता इसका इस्तेमाल कोलंबिया में होता है। इसको शैतान का श्वास कहा जाता है। क्योंकि यह आसानी से वितरित हो जाती है। यदि कोई अपराधी अगर इसे अपने चेहरे पर इसको फेंक देता है या उड़ा देता है तो वह अपने मूल रूप से लगभग 24 घंटे के लिए आत्म नियंत्रण और जागरूकता को खो देता है। इसको लेने से व्यक्ति चीजों को भूलने लगता है अर्थात् उसको एम्नेसिया हो जाता है।
3.नटमेग

  • मनोवैज्ञानिक बीमारी, मतिभ्रम, मांसपेशियों की ऐठन, अधिक मुत्रस्राव, अधिक बेचैनी।
  • यह मतियुगजल्य है। इससे ह्रदय की गति बढ़ जाती है।

4. मानव विकास हार्मोन

यह एथलीटो में लोकप्रिय माना जाता है। एक्रोमेगाली नामक हालात को जन्म देने के लिए जाना जाता है । जिसके कारण त्वचा मोटी हो जाती है।

दातों में गैप

इस दवा को मृत शरीर से बनाया जाता है। जिसके कारण क्रुतजेल्फेट - जाकोब रोग हो जाता है। यह रोग पागल गाय के समान है लेकिन यह पागल मानव रोग है।

5. डीनीटरोफिनॉल

यह वज़न घटाने के लिए उपयोग की जाती है। इसका आविष्कार 1930 में हुआ। व्यक्ति के शरीर से वसा जलाने के साथ ही शरीर में एसिड की मात्रा को बढ़ा देती है।

नासा द्वारा मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए इनसाइट मिशन लांच



  • दो मिनी सेटेलाइटों के साथ ‘इनसाइट’ यान का प्रक्षेपण किया।
  • यह यान इस साल के नवंबर महीने में मंगल पर उतरेगा
  • एटलस-पांच रॉकेट के माध्यम से इस यान का कैलिफोर्निया के वैंडनबर्ग एयर फोर्स स्टेशन से सफल प्रक्षेपण किया गया.
  • नासा के अध्यक्ष जिम ब्रिडेंस्टाइन

Insight mission

  • इस यान द्वारा मंगल के तापमान का पता लगाने के लिए 16 फुट तक खुदाई की जायेगी
  • इस आभियान की विशेषता - एक रोबोटिक जियोलॉजिस्ट (रोबोट भूविज्ञानी) भी भेजा गया है और यही मंगल की सतह पर गहरी खुदाई करके सतह पर होने वाले कंपनों को मापेगा.
  • मंगल की आंतरिक संरचना की गहराई से अध्ययन करेगा.
  •  वैज्ञानिकों का अनुमान मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा के पास दिन का ग्रीष्मकालीन तापमान 70 डिग्री फोरेनहाइट (20 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है, लेकिन फिर रात से -100 फोरेनहाइट (-73 सेल्सियस) तक पहुंच जाता है.
  • इनसाइट में अति-संवेदनशील सेस्मोमीटर लगा है- यह मंगल पर भूकंप की स्थिति का पता लगायेगा
  1. नासा मंगल ग्रह से पर्दा उठाने के लिए कई रोवर भेज चुकी है. उसने वर्ष 2003  में ‘अपॉरच्युनिटी’ और वर्ष 2011  में ‘क्यूरियोसिटी’ रोवर मंगल पर भेजा था.

https://mars.nasa.gov/insight/
 

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

ओब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर


यह  एक ऐसा मनोरोग है जिसमें मनुष्य
  किसी सामान्य प्रक्रिया को बार -बार दोहराने के लिए विवश हो जाता है
ऐसे रोगी अक्सर बार बार हाथ धोते है पैसे गिनते है, बंद ताले या दरवाजे की जांच करते है, आपने लिखे को आशंका से बार बार देखते है कभी कभी ये लोग अनजाने डर के साये में जीते हैं।

फोबिया भी इससे मिलता जुलता रोग है जिसमें व्यक्ति किसी भय से स्थायी रूप से पीड़ित हो जाता है जैसे- बंद कमरे. रोगों का भय, भीड़ का भय, सामाजिक स्थितियों का भय आदि हो सकता है ।


               बाइपोलर डिस्ऑर्डर

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें दो मानसिक रोगों का मेल दिखाई देता है।

पहला- अवसाद

दूसरा- मेनिया या उन्माद

जब एक ही व्यक्ति में ये दोनों समस्याएं बारी -2 से दौरे के रूप में दिखाई देती है तो उसे बाइपोलर डिसऑर्डर कहते है। या इससे ग्रस्त व्यक्ति


मेनिया में व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश, उत्तेजित, उल्लासित महसूस करता है। वह सामान्य से ज्यादा सक्रिय हो जाता है और बहुत ज्यादा पैसे खर्च करता है, या किसी अन्य तरीके से खुशी का इजहार करने लगता है। इसे मूड एपिसोड्स कहते है। यह 35 से 60 की आयु वर्ग में व्यक्तियों इसके आसार सबसे ज्यादा होते है।      

यह रोग गरीब परिवार की तुलना में धनी वर्ग के लोगों अधिक पाया जाता है।




मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

                               करी पत्ती

  •  सीएसआईआर कोलकाता
    • मौजूद तत्व - महानाइन
    • लिस्मैनिया डोनोवानी (काला ज्वर) को खत्म करने में मद्दगार होगी
    • दुनिया भर में हर साल 50 हजार काला ज्वर के मामले सामने आते है।
    • स्वस्थ्य कल्याण मंत्रालय के अनुसार यह महामारी देश के पूर्वी राज्यों ( बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल) काफी ज्यादा है
       
    • भारत में काला ज्वर से लडने के लिए मुख्य रूप से तीन दवाये उपलब्ध है। 1. मिल्टेफोसिन (खाने की दवा) 2. एमफोटेरिसिन (इंजेक्शन) 3. परमोमयसीन(लैप)
    •  इसका सुराख चरक संहिता में मिला
    • रिपोर्ट के नतीज - सांइंटिफिक रिपोर्ट पत्रिका में छपे है।
    • प्रयोग- चुहों पर किया गया'

  •  
 

सोमवार, 9 अप्रैल 2018

भारत के प्रमुख बांध

भारत में निर्मित प्रमुख बांध और राज्य में स्थापना 


क्र. सं.     बांध का नाम           नदी  जिस पर निर्मित                         राज्य 
  1. भाखड़ा नंगल                 सतजल                                             पंजाब
  2. रिहंद                                रिहंद                                                उत्तर प्रदेश
  3. फरक्का                          गंगा   नदी                                         पश्चिम बंगाल
  4. नागार्जुन सागर                कृष्णा नदी                                     आंध्रप्रदेश
  5. गांधी सागर                     चंबल                                             मध्यप्रदेश
  6. हीराकुंड                            महानदी                                          ओडिशा
  7. टिहरी                              भागीरथी(गंगा)                                 उत्तराखंड
  8. लखवार                            यमुना                                               उत्तराखंड
  9. भाखडा                               सतलज                                             हिमाचल प्रदेश
  10. रंजीत सागर                        रावी                                              पंजाब
  11. चेमेराई                              रावी                                                  हिमाचल प्रदेश
  12. सरदार सरोवर                   नर्मदा                                            गुजरा
  13. उकाई                              ताप्ती                                                गुजरात
  14. रामगंगा                             रामगंगा                                     उत्तराखंड
  15. मेदूर                                   कावेरी                                          गुजरात
  16. कर्जन                              कर्जन                                                गुजरात
  17. कोयना                              कोयना                                           महाराष्ट
  18. पोचमापाड                           गोदावरी                                            आंध्र प्रदेश
  19. मैथन                                  बराकर                                            झारखंड
  20. पंचेत                                 बराकर                                             झारखंड
  21. नगी                                नगी                                                  बिहार
  22. पोंग                                   व्यास                                                  हिमाचल प्रदेश
  23. जमरनी                             गोला                                           उत्तराखण्ड
  24. मुल्ला पेरियार                        पेरियार                                       केरल
  25. कोकी                                     कोकी नदी                                       केरल
  26. चेरूठोणी                                    चेरूठोेणी                                  केरल
  27. इडुमिलियर                          इडुमिलियर                                     केरल
  28. सूपा                                  काली नदी                                             कर्नाटक
  29. लखिया                                 लखिया   होल                                     कर्नाटक
  30. अल्लमाटी                               कृष्णा                                              कर्नाटक
  31. शलियार                              शालियार                                      तमिलनाडु
  32. सलाल                              चिनाब                                             जम्मू -कश्मीर
  33. निम्मो       बाजगो                     सिंध                                       जम्मू- कश्मीर
  34. चुटका                                  सुरू                                               जम्मू-कश्मीर
  35. पकाल ढुल                            मरुसूदर                                            जम्मू-कश्मीर
  36. बगलिहार                             चिनाब                                          जम्मू-कश्मीर
  37. श्रीसैलम                               कृष्णा                                             आंध्र प्रदेश
  38. इडुक्की                                     पेरियार                                       केरल
  1. सुबनसिरी                                सुबनसिरी                                अरूणाचल प्रदेश       
-     
WHATSAPP NO. 9455907317 

सोमवार, 1 जनवरी 2018

गेम डिस्आर्डर

                      बहुत ज्यादा गेम खेलने की बीमारी

  • ड्बल्यूएचओ की डायग्नोस्टक मैनुअल इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिज़ीज़ का 11वां एडिशन 27 साल पहले अपडेट हुआ था और अब 2018 में पब्लिश होने वाला है। ड्ब्ल्यूएचओ के इस मैनुअल में बहुत ज्यादा विडियो गेम खेलने को गंभीर मानसिक बीमारी की कैटिगरी में रखने की बात कही जा रही है।
  • आईसीडी एक नैदानिक नियमावली है जिसे ड्ब्ल्यूएचओ द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जिसे पिछली बार 27 साल पहले 1990 में अपडेट किया गया था।
  • ड्ब्ल्यूएचओ द्वारा जारी 11वें संस्करण के मसौदे में गेमिंग डिसआर्डर को स्थायी या आवर्ती खेल व्यवहार के तौर पर बताया गया है. जो ऑनलाइन या ऑफलाइन हो सकता है। इस मसौदे में कई तरह के व्यवहारों को सूचीबद्ध किया गया है. जिससे चिकित्सक यह तय कर सकते है कि किसी व्यक्ति का व्यवहरा गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में पहुंच गया है। या नहीं
  • ड्ब्ल्यूएचओ के डिपार्टमेंट ऑफ मेंटल हेल्थ एेंड सब्सटेंस अब्यूज के व्लादिमिर पोज्नयाक बताते है कि बहुत ज्यादा विडियो गेम खेलने की बीमारी के रूप में समझाना एक बेहद अहम मुद्दा है। पोज्नयाक कहते हैं ज्यादातर लोग जो विडियो गेम खेलते हैं उन्हें बीमारी नहींं होती है. हलांकि कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा एेल्कोहॉल का सेवन करने या फिर जरूरत से ज्यादा विडियो गेम खेलने का शरीर पर विपरित असर पड़ सकता है।

 विडियो गेम

विडियो गेम या वीडियो खेल एेसे इलेक्ट्रॉनिक खेल होते है जिसमें यूजर इंटरफेस के साथ परस्पर क्रिया करके दृश्य प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है।
वीडियो गेम खेलने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को प्लेटफॉर्म या मंच के रूप में जाना जाता है. पर्सनल कम्प्यूटर और वीडियो गेम के लिए विशिष्ट तौर पर बनाई गई मशीन जिसे कंसोल कहते है. ज्यादातर वीडियो गेम के लिए प्रयोग में लिए जाते है। आर्केड गेम के रूप में वीडियो गेम के जो पहले आम थे. उपयोग में धीरे-धीरे गिरावट आई है।  

शनिवार, 23 दिसंबर 2017

                   कुपोषण और भूंखमरी

  • जीना हर बच्चे और हर शिशु का अधिकार है कोई भी मौत उसके नैसर्गिक अधिकार का हनन है।
    अमेरिका स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की तरह से जारी किए जाने वाले इस सूचकाक के जरिए  भूखमरी और कुपोषण का आकलन किया जाता है।
    •  ग्लोबल इंडेक्स ज्यादा होेने का मतलब है उस देश में भूख की समस्या अधिक है 
    इसे नापने का चार प्रमुख पैमाने- 
  1. कुपोषण
  2. शिशुओं में भयांकर कुपोषण
  3. बच्चों के विकास में रुकावट 
  4. बाल मृत्यु दर
  • भारत में फाइट हंगर फांउडेशन और एसीएफ इंडिया ने मिलकर जनरेशनल न्यूट्रिशन प्रोग्राम की शुरूआत की।
  • विश्व बैंक ने कुपोषण की तुलना ब्लेैक डेथ नामक महामारी से की है। जिसने 18वीं सदी में यूरोप की जनसंख्या के एक बडे हिस्से को निगल लिया ता।ॉ
  •  
  

                                          Kanyakumari

 Kanyakumari (alter Name: Cape Comorin)


  •  यह हिन्द महासागर , बंगाल की खाड़ी  और अरब सागर का मिलन स्थल है। 
  • कन्याकुमारी अम्मन मंदिर- यह मंदिर पार्वती को समर्पित है।  तीनों समुद्रों के संगम स्थल पर स्थित है।  भक्तजन मंदिर में प्रवेश करने से पहले त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाते है। मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार हमेशा बंद करके रखा जाता है। क्योंकि मंदिर में स्थापित देवी के आभूषण की रोशनी से समुद्री जहाज इसे लाइटहाउस समझने की भूल कर बैठते है जिससे जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है।
  • गांधी स्मारक- 
  • यहां महात्मा गांधी की चिता की राख रखी हुई है। इस स्मारक की स्थापना 1956 में हुई थी। महात्मा गांधी 1937 में यहां आए थे। उनकी मृत्यु के बाद 1948 में कन्याकुमारी में ही उनकी अस्थियां विसर्जित की गई थी। स्मारक को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि  महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर सूर्य की प्रथम किरण  उस स्थान पर पड़ती है जहां उनकी राख रखी हुई है।
  • तिरूवल्लूवर मूर्ति- तिरूक्कुरुल की रचना करने वाले अमर तमिल कवि तिरूवल्लुवर  की यह प्रतिमा पर्यटकों को बहुत लुभाती है । 38 फीट ऊंची आधार पर बनी, 95 फीट की है इसकी कुल ऊंचाई-133 फीट इसका वजन-2000 टन , कुल 1283 पत्थरों  के टुकड़े उपयोग किये गये।
  • विवेकानन्द रॉक मेमोरियल- इस स्थान को श्रीपद पराई के नाम से भी जाना जाता है। यहां विवेकानन्द जी ध्यान लगाया था। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर कन्याकुमारी ने भी तपस्या की थी।  कहा जाता है कि यहां कुमारी देवी के पैरों के निशान मुद्रित हैं।  इस स्मारक के दो हिस्से है 1. विवेकानन्द मंडपम 2. श्रीपद मंडपम

                                       तिरुवनन्तपुरम

  • केरल की राजधानी

    • महात्मा गांधी जी ने इस नगर को भारत का सदाबहार नगर  की संज्ञा दी।
    • इस शहर का नाम शेषनाग अनंत  के नाम पर पड़ा जिनके ऊपर पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु) विश्राम करते है। 
    • 1956 में केरल राज्य के बनने के बाद से यह केरल राज्य की राजधानी है।
    • यही पद्मानाभस्वामी का मंदिर है जो करिब 2000 साल पुराना है। यह मंदिर केरल और द्रविडि़यन वास्तुशिल्प में निर्मित है । इस मंदिर में केवल हिन्दू ही प्रवेश करते है। पुरुष यहां केवल सफेद धोती पहन कर यहां आ सकते है।
    • यह भारत के केरल राज्य के दक्षिणी -पश्चिमी तट पर स्थित है।
    • देशान्तर 76.9 डिग्री तथा अक्षांश8.5 डिग्री
    • जनवरी का तापमान- 29 से 23 के बीच
    • तिरूवनंतपुरम वेधशाला- इसका निर्माण महाराजा स्वाति तिरूल ने 1837 में इसका निर्माण करवाया था। यह भारत की सबसे पुरानी वेधशालाओं में से एक है। 
    • चिड़ियाघर- पीएमजी जंक्शन के पास स्थित यह चिड़ियाघर भारत का दूसरा सबसे पुराना चिड़ियाघर है। इसका निर्माण 1857 में हुआ था। रैप्टाइस हाउस में सांपों की अनेक प्रजातियां रखी गई है। 
    • नेपियर संग्रहालय- लकडी से बनी यह आकर्षक इमारत शहर के उत्तर में म्यूजियम रोड पर स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने संग्रहालयोें में से एक है। इसका निर्माण 1855 में हुआ। मद्रास के गवर्नर लॉर्ड चाल्स नेपियर  के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया।
    • चाचा नेहरू बाल संग्रहालय़- इसकी स्थापना 1980 में हुई। यह सिटी सेन्ट्रल बस स्टेशन से 1 किमी  उत्तर में स्थित है। 
    • कोवलम बीच - यह तिरूवनंतपुरम से 16 किमी दूर स्थित  कोवलम बीच है जो रेतीले तटों पर नारियल के पेडों और खूबसूरत लैगून से सजे ये बीच पर्यटकों को लुभाते है।  इसके दक्षिणी छोर पर स्थित लाइट बीच सबसे ज्यादा आकर्षित करता है।  यह विश्व  के सबसे खुबसूरत तटों में से एक है। 
      • Veli LaKE
         PONMUDI HILL
      •  

रविवार, 5 नवंबर 2017

जिंदा होकर भी जिंदा नहीं

बिना पहचान के लोग
विश्व बैंक ने कहा कि दुनिया भर में 110 करोड़ लोग एेसे है जो अधिकारिक तौर पर दुनिया में हैं ही नहीं । यानी कि उन लोगों की कोई पहचान नहीं है। ये लोग बिना किसी पहचान, प्रमाण के जींदगी गुजार रहे है।

 विश्व बैंक को विकास के लिए  पहचान कार्यक्रम के तहत यह जानकारी प्राप्त हुई है ।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 1/3 संख्या बच्चों की है जिनका जन्म के समय पंजीकरण नहीं हुआ।


बिना पहचान पत्र वाले लोगः
  • 78  उपसहारा अफ्रीका और एशिया में हैा
  •  40% आबादी  18 साल से कम उम्र के लोगों की 
  • 5 साल का हर छठा बच्चा बिना पहचान का 
  • विश्व बैंक के मुताबिक दुनिया में बिना पहचान के जीने वाले लोगों की संख्या भारत में है। 
आयवर्ग                       आबादी करोड़ में
निम्न मध्य आय             59.93  
निम्न आय                 34.00
उच्च मध्य आय            9.59

उच्च आय वाले देशों में बिना पहचान के  जी रहे है। उसी सूची में अफ्रीका पहले पायदान पर है।उच्च मध्य आय वाले देशों में बिना पहचान के जी रहे है इसमें दक्षिण एशिया का पहला स्थान है। 

दुनिया की लगभग 18 % आबादी के पास पहचान पत्र नहीं है।


बिना पहचान पत्र वाले लोगों में महिलाएं-------
देश                         महिलाएं(प्रतिशत)
माल्दोवा                      71.55
अल सल्वाडोर              57.32
स्लोवेनिया                 56.88
फलिस्तीन                 52.10
इटली                         51.64
फिनलैंड                      51.57
  
देश                           आबादी
भारत                        20.97 करोड़

नाइजीरिया                14.91 करोड़
अमेरिका                   9.50 करोड़
पाकिस्तान               8.30 करोड़
इथोपिया                  6.43  करोड़
बांग्लादेश                  4.20 करोड़
डी आर कांगो            3.39 करोड़

तंजानिया                  2.93 करोड़ 
साउदी अरब              2.31 करोड़
युंगाडा                    2.03 करोड़
चीन                       1.36 करोड़

प्रतिशत के हिस्सा हिस्सा से बिना पहचान वाले लोग------------
देश                         आबादी (प्रतिशत)
नाइजीरिया              77.77 
इरीट्रिया                     71.28
सउदी अरब                 70.79 
सोमालिया                     70.31
कुवैत                         68.50
मोनाको                       63.18
इथोपिया                      61.68
ओमान                        61.46
इंडिया                       लगभग 15


क्षेत्र के हिसाब से बिना पहचान पत्र वाले लोग---------
 क्षेत्र                   आबादी करोड़ में
अफ्रीका                   50.02
दक्षिण एशिया                35.70
मध्य पूर्व और उत्तरीय अफ्रीका---- 8.24 
पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र 7.21
लैटिन और मध्य अमेरिका-----4.55 
पूर्व और मध्य एशिया ------- 1.90 
अन्य                       2.45

विश्व बैंक ने आय के मुताबिक देशों को चार भागों में बांटा है जिनमें निम्न और मध्य आय वाले देशों के हालात सबसे ज्यादा खराब है।


 पहचान न होने के कारण
* गैर पंजीकृत लोग क्यों है-
  • कुछ लोगों को पंजीकरण का महत्व ही नहीं मालूम , जागरूकता के चलते   इनके बच्चे पहचान से महरूम हो जाते है।
  • कई देशों में पंजीकृत पाने की लागत ज्यादा है।
  • गरीबी और अशिक्षा 
  • पंजीकरण केन्द्र की दूरी
  • सरकारी दफ्तरों में जाने का डर
  • अधिकारियों के रवैया
  • भ्रष्टाचार
  • तंत्र में अविश्वास व रूढ़िवादिता
  • कुछ समूदायों के बीच लोगों को पहचान जाने का डर
  • सरकारी नीतियां
  • सरकारी भेदभाव तथा सुविधाएं छिननें का डर
गैर-पंजीकृत लोग कौन है---
  • अल्पसंख्यक 
  • अवैध प्रवासी
  • अनाधिकृत लोग
  • हिंसा पीड़ित
  • घुंमन्तू जातियां

आधार का इस्तेमाल-----------
बैंक खाते , लोन , पेंशन, मनी ट्रांसफर, टेक्स भुगतान, सामाजिक लाभ, नौकरी आदि.....

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर
 इसे 2010 में 15 राज्यों तथा दो केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वभाविक निवासियों के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर तैयार करने का काम शुरू हुआ। इसके लिए डाटा संकलन और एंट्री का काम भारत सरकार के आईटी विभाग को दिया गया। 62 करोड लोगों की पहचान से जुडी तमाम सूचनाएं शामिल की गयी। यह काम अक्टुबर 2013 में पूर्ण हो गया।
 भारत में पहचान के कानूनी प्रमाण -----------
  • जमीन के फोटो युक्त कागजात
  • पीओआई कार्ड, पैन कार्ड
  • जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • फोटो युक्त किसान बही
  • शस्त्र लाइसेंस, सरकारी विभागों से जारी पहचान पत्र
  • बैंक पासबुक , फोटो बैंक एटीएम कार्ड
  • स्वतंत्रता सेनानी पहचान पत्र
  • फोटो क्रेडिट कार्ड, शादी पंचीकरण
  • गजट नोटिफिकेशन, गैस कनेक्शन
  • दिव्यांग सर्टिफिकेट, पेंशनर कार्ड
  • सर्विस रिकार्ड पुस्तिका, वेतन की कापी
  • जाति व निवास प्रमाण पत्र
  • मतदाता पहचान पत्र
मतदाता पहचान पत्र------
निर्वाचन आयोग से जारी मतदाता पहचान पत्र भारत में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। देश में 18 साल से ज्यादा के लोग जो मतदाता के तौर पर पंजीकृत है। देश में 81.4 करोड़ मतदाताओं में से 95% वोटरों के पास वोटर आईडी है।
सर्वाजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले लाभ से जु़ड़ा राशन कार्ड लोगों को पंजीकरण और पहचान यह भी एक माध्यम है।   



दुनिया के देशों में पहचान तंत्र

1. थाईलैंड में लागू नेशनल आईडी नंबर में वहाँ की सरकार नें देश व्यापी स्वास्थ्य कवरेज हासिल कर लिया है। इससे वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है।

2. पेरू में यूनिवर्सल रजीस्ट्रेशन एंड पॉपुलेशन स्कीम के चलते प्राकृतिक आपदाओं में जरूरत मंदों तक मदद पहुंचाने में तेजी आई है।
3. पाकिस्तान में बायोमेट्रिक पहचान के व्यवस्या के बाद महिलाओं को डायरेक्ट कैश ट्रांसफर में मदद मिली है।जिससे वह अपने अनुसार खर्च पाने की स्थित में आयी है।
4. भारत में आधार योजना के चलते सरकारी लाभ और सब्सिडी सीधे जरूरत मंदों के खातों में पहुँचने में मदद मिल रही है।           
 
  

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची

डब्ल्यूएचओ ने पहली आवश्यक डायग्नोस्टिक सूची  By Anurag  आम रोगों और प्राथमिकता वाले रोगों के निदान के लिए आवश्यक परीक्षणों की एक सूची ...